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मिजोरम से इंफाल और फिर चुराचांदपुर: 2023 की जातीय हिंसा के बाद पीएम मोदी का पहला मणिपुर दौरा

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नई दिल्ली

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मणिपुर दौरे पर हैं। 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा के बाद यह उनका पहला दौरा है। वह मिजोरम की राजधानी आइजोल से इंफाल पहुंचे और वहां से सीधे चुराचांदपुर रवाना हुए।


इस यात्रा से जुड़ी 10 अहम बातें—
1.    मणिपुर आने से पहले पीएम मोदी ने मिजोरम में कई परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें 8,070 करोड़ रुपये की लागत से बनी बैराबी-सैरांग रेलवे लाइन प्रमुख है, जो राज्य को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगी।
2.    इसके साथ ही उन्होंने 45 किलोमीटर लंबे आइजोल बाईपास रोड, थेंजॉल–सियालसुक और खानकॉन–रोंगपुरा सड़कों तथा मुआलखांग स्थित एलपीजी बॉटलिंग प्लांट का भी शुभारंभ किया।
3.    पीएम ने छिमतुइपुई नदी पर प्रस्तावित पुल और ‘खेलो इंडिया’ मल्टीपर्पज इंडोर हॉल की आधारशिला भी रखी।
4.    मिजोरम से निकलकर वह मणिपुर की राजधानी इंफाल पहुंचे और फिर चुराचांदपुर के लिए रवाना हुए। यह इलाका कुकी समुदाय का गढ़ है और पिछले साल की हिंसा में सबसे ज्यादा प्रभावित रहा था। हिंसा में करीब 260 लोगों की मौत हुई थी और हजारों लोग विस्थापित हुए थे।
5.    खास बात यह है कि 1988 में राजीव गांधी के बाद पीएम मोदी चुराचांदपुर जाने वाले पहले प्रधानमंत्री बनेंगे।
6.    दोपहर करीब साढ़े दो बजे वह वापस इंफाल लौटेंगे, जहां 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की योजनाओं का उद्घाटन करेंगे और कांगला किले में जनसभा को संबोधित करेंगे।
7.    इंफाल में मोदी 101 करोड़ रुपये की लागत से बने नए पुलिस मुख्यालय और 538 करोड़ रुपये से बने नए सिविल सचिवालय का लोकार्पण करेंगे। साथ ही 3,647 करोड़ की जल निकासी प्रणाली और 550 करोड़ रुपये के ‘मणिपुर इन्फोटेक डेवलपमेंट (MIND) प्रोजेक्ट’ जैसी बड़ी योजनाएं भी शामिल हैं।
8.    मणिपुर के मुख्य सचिव पुनीत कुमार गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री का यह दौरा राज्य में शांति और विकास का नया रास्ता खोलेगा। उन्होंने जनता से बड़ी संख्या में कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की।
9.    पीएम मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, “मैं 13 सितंबर को चुराचांदपुर और इंफाल में कार्यक्रमों में हिस्सा लूंगा। मणिपुर के सर्वांगीण विकास के लिए हम पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।”
10.    याद दिला दें कि मणिपुर में हिंसा 3 मई 2023 को शुरू हुई थी। मैतेई समुदाय को अनुसूचित जनजाति (ST) का दर्जा देने की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में ‘आदिवासी एकजुटता मार्च’ निकला था, जिसके बाद जातीय हिंसा भड़क उठी थी। उस समय विपक्ष ने हिंसा के बीच पीएम मोदी के राज्य न आने पर सरकार को कठघरे में खड़ा किया था।

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