द फॉलोअप डेस्क
अयोध्या (Ayodhya) में निर्मित राम मंदिर में स्थापित में प्रभु राम की मूर्ति से जूड़ा एक चमत्कार आपको हर साल रामनवमी (Ram Navami) पर मोहित करेगा। इसे आस्था और वैज्ञानिक प्रयासों का मेल कहा जा सकता है। क्योंकि इस प्रभाव को उत्पन्न करने के लिए वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम ने काम किया है। राम मंदिर के स्थापत्य के साथ इस वैज्ञानिक प्रयास का मेल विश्व में शायद ही कहीं औऱ दिखाई पड़े। रामनवमी यानी राम के जन्मदिन पर तीन मंजिला राम मंदिर से होते हुए जब सूर्य की किरणें प्रभु राम के ललाट को स्पर्श करेंगी, तो इन किरणों से मंदिर प्रकाशमय हो उठेगा। वैज्ञानिकों ने इसके लिए विशेष प्रकार के लेंस और प्रिज्मनुमा आभूषणों का प्रयोग किया है, जो कि रामलला की मूर्ति के ललाट पर लगे हैं।

पीएम मोदी ने जाहिर की थी ये इच्छा
बताया जाता है कि पीएम मोदी ने प्रभु राम की मूर्ति को लेकर ये परिकल्पना की थी। इसे वैज्ञानिकों और मंदिर के स्थापत्य कलाकारों ने आज साकार कर दिखाया है। बता दें कि रामलला के ललाट पर सजे इस विशेष आभूषण को ‘सूर्य तिलक तंत्र” नाम दिया गया है। ये एक प्रकार का आधुनिक उपकरण है। सूर्य की किरणें जब सूर्य तिलक तंत्र पर गिरेंगी तब इससे विशेष तरह का प्रभाव उत्पन्न होगा। ये हर किसी को आकर्षित करेगा। इस उपकरण को बनाने में रड़की के कंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीबीआरई) के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है।

इस तरह काम करेगा ‘सूर्य तिलक तंत्र”
‘सूर्य तिलक तंत्र” में एक गियरबॉक्स, परावर्तित लेंस और प्रिज्म का इस्तेमाल किया गया है। इन तीनों को उपकरण में इस तरह से एरेंज किया गया है कि सूर्य की किरण इस पर पड़ने से खास तरह का प्रिज्म प्रभाव उत्पन्न होगा। सूर्य की किरणें उपकरण से टकराकर मंदिर के प्रांगण तक को दिव्यमान करेगा। लेकिन इस चमत्कार को देखने के लिए भक्तों को रामनवमी तक का इंतेजार करना होगा। ये दुर्लभ क्षण रामनवमी के दिन दोपहर 12 बजकर 6 मिनट पर दिखाई पड़ेगा। वैज्ञानिकों ने कहा है कि इस प्रक्रिया को संपन्न कराने में सूर्य की किरणों से संबंधित खगोलिय शास्त्र के सिद्धांतों को ध्यान में रखा गया है।
