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21 राज्यों के स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण- हरिवंश

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तिरुपति
राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने आज जमीनी स्तर पर महिलाओं के बढ़ते प्रतिनिधित्व की सराहना करते हुए कहा कि लैंगिक समानता और महिला सशक्तीकरण भारत की विकास गाथा के अभिन्न अंग हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कानूनी और नीतिगत बदलावों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता में सुधार भी आवश्यक है।

 हरिवंश आज तिरुपति में महिला सशक्तीकरण समिति पर आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि 2023 में नए संसद भवन में ऐतिहासिक महिला आरक्षण विधेयक के पारित होने से आने वाले समय में राष्ट्रीय नेतृत्व में और अधिक महिलाएँ शामिल होंगी। उन्होंने इस बात को याद किया कि कैसे 2006 में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार ने शासन के तीसरे स्तर पर महिलाओं के लिए 50% आरक्षण प्रदान करके एक अग्रणी कदम उठाया था। आज लगभग 21 राज्यों में स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण है, जिसके परिणामस्वरूप जमीनी स्तर पर 14.5 लाख से अधिक महिला प्रतिनिधि हैं।

लैंगिक समानता पर डॉ. राम मनोहर लोहिया के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए  हरिवंश ने कहा कि लोहिया ने बार-बार इस बात पर ज़ोर डाला था कि जाति या वर्ग के उत्पीड़न की तरह ही महिलाओं के साथ भेदभाव भी एक सामाजिक अभिशाप है, जिससे स्वतंत्र रूप से निपटने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आज केंद्रीय मंत्रालयों की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से ऐसी बाधाओं को दूर करने के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण है, जिनमें से कुछ ने महिलाओं को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण संरचनात्मक बदलाव लाए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) के तहत खोले गए 56 करोड़ से अधिक बैंक खातों का उदाहरण दिया।

 हरिवंश ने मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के दूरदर्शी नेतृत्व की भी सराहना की, जिन्होंने 1990 के दशक के अंत और 2000 के दशक में अविभाजित आंध्र प्रदेश को एक प्रौद्योगिकी केंद्र के रूप में बनाया, जिससे युवा भारतीयों की एक पीढ़ी, जिसमें कई युवा लड़कियाँ भी शामिल थीं, को उच्च-कुशल क्षेत्रों में अवसर मिले। उन्होंने तिरुपति के पास  सिटी को आर्थिक गतिविधि का उल्लेखनीय उदाहरण है, जहाँ उद्योगों में आधे से अधिक कार्यबल महिलाएँ हैं जो पर्यवेक्षक, शॉप फ्लोर इंजीनियर, योजनाकार और प्रशासक के रूप में काम कर रही हैं।

आखिर में,  हरिवंश ने इस बात पर जोर दिया कि जनजातीय पृष्ठभूमि से एक महिला का भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना जाना यह दर्शाता है कि कैसे प्रेरणादायक यात्राएँ समाज को सकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती हैं।


 

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