द फॉलोअप डेस्क, रांचीः
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, रूबेला सामान्य खसरे की तुलना में कम गंभीर संक्रमण माना जाता है, लेकिन बच्चों में समय पर इलाज और देखभाल न मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है। खासकर जब रूबेला के साथ निमोनिया, मलेरिया, सामान्य खसरा या दिमागी बुखार जैसी बीमारियां भी हो जाएं, तो यह जानलेवा साबित हो सकता है। रूबेला हवा के जरिए फैलने वाला संक्रमण है। संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा में मौजूद ड्रॉपलेट्स के जरिए वायरस दूसरे व्यक्ति के शरीर में पहुंच सकता है। संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क या उसकी लार के संपर्क में आने से भी संक्रमण फैल सकता है।संक्रमण के संपर्क में आने के करीब 14 से 21 दिनों बाद इसके लक्षण दिखाई देने लगते हैं।
.jpeg)
मध्य प्रदेश में रूबेला के साथ इन वायरस के मामले भी सामने आएं
मध्य प्रदेश के बालाघाट में बैगा जनजाति बहुल बिरसा और बैहर ब्लॉक में इस साल जून से अगस्त के बीच रूबेला के साथ निमोनिया, मलेरिया और दिमागी बुखार के मामले सामने आए। इस दौरान 431 बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि आदिवासी इलाकों में इस संक्रमण और उससे जुड़ी बीमारियों के कारण 31 से ज्यादा बच्चों की मौत की बात सामने आई है। यह स्थिति बच्चों में समय पर पहचान, इलाज और देखभाल की जरूरत को रेखांकित करती है।
यह भी पढें: झारखंड में रूबेला का पहला मामला दर्ज, सिमडेगा में 10 वर्षीय बच्ची संक्रमित; स्वास्थ्य विभाग ने बनाया वॉर रूम