द फॉलोअप डेस्कः
उत्तराखंड में सेब किसानों ने जनवरी के दौरान ऊंचे इलाकों में हुई कम बर्फबारी को लेकर चिंता व्यक्त की है। जनवरी का पहला हफ्ता गुजर गया है, लेकिन अब तक पर्याप्त बर्फबारी और बारिश नहीं हुई है। सेब को उसके जरूरत के हिसाब से ठंडा वातावरण नहीं मिला तो उनके क्वालिटी में फर्क आ जाएगा। सेबों का आकार घट जाएगा मिठास भी कम हो जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्द बारिश और बर्फबारी न हुई तो सेब के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। सेब के साथ-साथ नाशपाती, पुलम, खुमानी आदि पर भी इसका असर पड़ेगा।

चिलिंग पीरियड नहीं मिला है सेब को
हिमाचल प्रदेश में बारिश और बर्फबारी न होने से 5500 करोड़ रुपये का सेब का कारोबार खतरे में पड़ गया है। बर्फ न पड़ने से पौधों की चिलिंग प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। सेब को फलने-फूलने के लिए 800 से एक हजार घंटे का चिलिंग पीरियड चाहिए होता है। हिमाचल प्रदेश में बड़ा देव कमरूनाग और इंद्रूनाग बारिश के देवता माने जाते हैं। जब भी मौसम में ऐसे बदलाव आते हैं तो लोग इनकी शरण में जाते हैं और भगवान से प्रार्थना करते हैं कि ज्यादा से ज्याद बारिश हो।

25 हजार हेक्टेयर में सेब के बगीचे
बता दें कि उत्तराखंड में उत्तरकाशी, चमोली, नैनीताल, बागेश्वर, अल्मोड़ा, चंपावत और देहरादून का चकराता सेब उत्पादक क्षेत्र हैं। बारिश न होने से पौधों को जमीन से पर्याप्त नमी नहीं मिल पा रही है। वर्तमान में राज्य में 25 हजार हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में सेब के बागीचे लगे हैं।
