रांची
आलोचक व समीक्षक रविभूषण ने सबलोग पत्रिका के मिलन समारोह में कहा कि ये समय खुद को बचाये रखने का है। बता दें कि राष्ट्रीय मासिक पत्रिका सबलोग का 15वां वार्षिक समारोह रांची प्रेस क्लब में किया गया। कार्यक्रम में किशन कालजयी द्वारा संपादित पुस्तक ‘आंदोलन, आजादी और 75 वर्ष’ का विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक सबलोग में प्रकाशित महत्वपूर्ण आलेखों का संकलन है। मौके पर रविभूषण ने कहा कि यह समय खुद को बचाए रखने का है। इस विकराल समय में सबलोग जैसी पत्रिकाओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। सबलोग हमें आश्वस्त करता है कि ऐसे समय में भी हमारे पास ऐसा मंच मौजूद है, जो राष्ट्रीय स्तर पर अपनी बात रखने के लिए सार्थक है।

संपादक किशन कालजयी ने यादें साझा की
संपादक किशन कालजयी ने पत्रिका की शुरुआत और अब तक के सफर का संस्मरण साझा करते हुए कहा कि दिनमान और विचार जैसी पत्रिकाओं से उन्हें इसकी प्रेरणा मिली और उनके बंद हो जाने के बाद इस पत्रिका को शुरू करने का जज्बा। उन्होंने शुरुआत के अपने सभी साथियों को याद करते हुए सभी का शुक्रिया किया और कहा कि इस वैचारिक सामाजिक लड़ाई में अगर वे कभी लड़खड़ाए, तो बाकि लोग उन्हें संबल दें और आगाह भी करें। उन्होंने बताया कि सबलोग एक आंदोलन की तरह है, जिसका उद्देश्य जनसरोकार के मुद्दे को उठाना है और जनपक्षीय पत्रकारिता करना है।

मौके पर ये लोग थे मौजूद
बता दें कि सबलोग एक सामाजिक-वैचारिक पत्रिका है, जिसकी शुरुआत 13 जनवरी 2009 को दिल्ली से हुई थी। 15सालों के इस सफर में सामाजिक चेतना से जुड़े आलेख इसमें निरंतर प्रकाशित होते रहे, जिनमें विभिन्न विश्वविद्यालयों के प्राध्यापक, विचारक, लेखक और पत्रकार अपना लेखकीय योगदान देते रहे। यह पत्रिका आज भी प्रिंट और वेब प्रारूप में प्रकाशित हो रही है। मौके पर कथाकार रणेंद्र, योगेंद्र, मृत्युंजय श्रीवास्तव, पंकज मित्र, प्रकाश देवकुलिश, पत्रकार राजेंद्र तिवारी आदि उपस्थित थे।
