द फॉलोअप डेस्क
डिजिटल इंडिया के विजन को क्षेत्रीय भाषाओं के साथ जोड़ते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब तिरहुत (वैदेही) लिपि को गूगल कीबोर्ड के साथ-साथ एंड्रॉइड और आईओएस (iOS) जैसे प्रमुख मोबाइल प्लेटफॉर्म पर लाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद की इस घोषणा के बाद मैथिली भाषियों के बीच उत्साह की लहर दौड़ गई है। यह पहल न केवल तकनीकी सुविधा प्रदान करेगी, बल्कि डिजिटल युग में मैथिली की मौलिक पहचान को भी नई मजबूती देगी।.jpeg)
अब तक मैथिली बोलने और लिखने वाले लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म पर संवाद के लिए देवनागरी या रोमन लिपि का सहारा लेने को मजबूर थे, जिससे भाषा की पारंपरिक लिपि धीरे-धीरे मुख्यधारा से दूर हो रही थी। तिरहुत लिपि की डिजिटल उपलब्धता से भाषा की शुद्धता बनी रहेगी और नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध विरासत से जुड़ने का अवसर मिलेगा। सरकार का यह फैसला उन भाषाविदों और कार्यकर्ताओं की वर्षों पुरानी मांग का परिणाम है, जो मैथिली को उसकी मूल लिपि के साथ तकनीकी पहचान दिलाने के लिए संघर्ष कर रहे थे।
तकनीकी स्तर पर इस बदलाव का प्रभाव काफी व्यापक होगा। तिरहुत लिपि के डिजिटल मंच पर आने से मैथिली साहित्य, लोककथाओं, गीतों और शोध कार्यों को ऑनलाइन साझा करना बेहद आसान हो जाएगा। सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर अपनी मूल लिपि में टाइप करना अब सपना नहीं रहेगा। इसके साथ ही ई-गवर्नेंस प्लेटफॉर्म पर भी मैथिली की उपस्थिति बढ़ेगी, जिससे प्रशासनिक स्तर पर भी इस भाषा को और अधिक विस्तार मिलेगा।
सरकार का यह कदम विविधता में एकता के सिद्धांत को मजबूत करता है, जिसमें हर समुदाय को उसकी भाषा के माध्यम से तकनीक से जोड़ने का लक्ष्य है। मंत्री जितिन प्रसाद ने स्पष्ट किया है कि आवश्यक तकनीकी प्रक्रियाओं पर तेजी से काम हो रहा है ताकि जल्द ही करोड़ों मैथिली भाषी अपनी प्रिय लिपि का उपयोग अपने स्मार्टफोन पर कर सकें। यह फैसला सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।