रांची
पिछले एक-डेढ़ दशक से ईसाइयों को लेकर लोगों का नजरिया बदलता जा रहा है। यह हालत पूरे देश की है। कई राज्यों में ईसाइयों के प्रति हिंसा के मामले अचानक से बढ़ गये हैं। देश स्तर की बात करें तो झारखंड समेत देशभर में इस वर्ष अगस्त तक ईसाई समुदाय के खिलाफ 525 हिंसक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। ईसाइयों को अब न सिर्फ जान से मारने की धमकी मिल रही है, बल्कि उनको बुनियादी सुविधाओं से भी महरूम किया जा रहा है। कई जगह उनका सामाजिक बहिष्कार किया गया है। सिर्फ झारखंड की ही बात करें तो यहां सामाजिक बहिष्कार के 54 मामले दर्ज हो चुके हैं। यही नहीं, ईसाइयों को देश के जिन 13 जिलों में सबसे अधिक खतरा है, उसमें रांची भी शामिल है। हिंसा की लिस्ट में सबसे ऊपर उत्तर प्रदेश राज्य रहा है। ये आंकड़े हैं यूनाईटेड क्रिश्चियन फोरम संस्था के। इस मामले में यूनाईटेड क्रिश्चियन फोरम के प्रमुख एसी माइकल ने बताया है कि कैसे उत्तर भारत के राज्यों में ईसाई समुदाय की हालत बदतर हो रही है। फोरम का कहना है कि कई राज्यों में ईसाइयों को लेकर लोगों के बीच गलत धारणा बनी है या बनायी जा रही है।
हर साल बढ़ रही हैं हिंसक घटनाएं
माइकल बताते हैं कि मसीहियों के खिलाफ होने वाली हिंसक वारदात हर साल बढ़ रही है। यूनाईटेड क्रिश्चियन फोरम का अध्ययन यह भी बताता है कि 2014 में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा की 147 घटनाएं हुईं। चौंकाने वाली बात यह है कि यही आंकड़ा 10 साल में लगभग चार गुणा अधिक हो गया है। फोरम के आंकड़े बताते हैं कि ईसाइयों के खिलाफ जो भी हिंसक वारदात हुई, वह अनियंत्रित भीड़ की ओर से की गयी है। जबरन धर्मांतरण के नाम पर यह हिंसा की गयी है। फोरम के अनुसार 520 ईसाई समुदाय के लोगों को इन राज्यों में जबरन धर्मांतरण कराने के नाम पर निशाना बनाया गया। कई ईसाइयों पर थानों में झूठे मामले दर्ज कराये गये। हिंसा के बाद ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार भी किया जाता है। बता दें कि सामाजिक बहिष्कार के मामले में झारखंड और छत्तीसगढ़ राज्य सबसे आगे हैं।

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