द फॉलोअप टीम
रांची-कहते हैं कि जिसपर बीतता है जानता वही है। और जिसपर नहीं बीतता उसे बताने का कोई फर्क भी नहीं पड़ता। हम बात कर रहे हैं कोरोना वायरस की। लगातार बड़ते संक्रमण से बचने के लिए तमाम एहतियात बरतने की अपील सरकार से लेकर सामाजिक स्तर पर हो रही है लेकिन नतीजा क्या है, सभी देख और समझ रहे हैं। हर जगह पहले की तरह ही लापरवाही का आलम देखने को मिल रहा है। या फिर यूं कहें तो ज्यादा बेहतर होगा कि पहले से ज्यादा लोग लापरवाह नजर आ रहे हैं। ऐसे में सिर्फ किस्मत और दुआ ही है जो आपकी जान बचा सकती है। क्योंकि भगवान न करे अगर आपको कोरोना हो गया तो फिर ऊपर वाला ही मालिक है। दरअसल झारखंड में कोरोना से त्राहिमाम की स्थिति है।
बेड फुल, बगैर पैरवी नहीं बनेगी बात
रोजाना संक्रमण का दायरा बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 12 अप्रैल रात साढ़े 9 बजे तक झारखण्ड में 3680 कोरोना मरीज पाए गए हैं। नतीजा ये है कि कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या के साथ ही पूरा सिस्टम कोलेप्स दिख रहा है। सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल रिम्स लेकर CCL सहित कई अस्पतालों के बेड फुल हो चुके हैं। गंभीर हालत में आ रहे मरीजों को भी दूसरे अस्पतालों में लौटाया जा रहा है। यहां भी बदइंतजामी ऐसी देखी जा रही है, जिसकी कम से कम कोरोना काल में कल्पना नहीं की जा सकती। एंबुलेंस के बजाय ऑटो से कोरोना पेसेंट को रिम्स से दूसरे अस्पताल में भेजा गया। पहले की तरह मरीजों का कॉंटेक्ट ट्रेसिंग भी ठीक से नहीं हो रहा है। मरीज किसी तरह पैरवी आदी करवाकर अस्पताल में भर्ती भी हो जा रहे हैं तो उनके संपर्क में आए लोगों को जांच के लिए चप्पल घिसने पड़ रहे हैं। घरों को सील करना और सैनिटाइजेशन तो समझिए बीते जमाने की बात हो गई है।
कोरोना पीड़ित पूर्व विधायक ने जारी किया वीडियो
पिछले दिनों हुसैनाबाद के पूर्व विधायक कुशवाहा शिवपूजन मेहता कोरोना से संक्रमित पाए गए थे। कोविड वार्ड में भर्ती होने के बाद उन्होंने एक वीडियो जारी किया था। जिसमें वह अपनी पीड़ा जाहिर कर रहे थे। दरअसल कुशवाहा वही बोल रहे थे जो मौजूदा स्थिति है। कुशवाहा की ओर से जारी बयान के मुताबिक उनके पॉजिटिव पाए जाने के बाद उनके परिजनों की कोई जांच नहीं की गई। और न ही उनसे यह जानने की कोशिश की गई है कि आखिर उनके संपर्क में कौन- कौन लोग आये थे।
द फॉलोअप को महिला ने सुनायी आपबीती
द फॉलोअप को फोन कर रांची की एक महिला ने बताया कि उसका भाई कोरोना से संक्रमित पाया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने उसे तो कोविड वार्ड में भर्ती कर दिया लेकिन परिवार के किसी भी सदस्य का कोरोना टेस्ट नहीं कराया गया। महिला के अनुसार जो टीम आई उन्हें जाँच के लिए कहने पर कहा गया कि आप खुद से जाँच करवा लीजिये। हालांकि महिला ने कई जगह फोन मिलाया और पैरवी करायी तब जाकर बाद में अधिकारियों का फोन आया कि परिवार का कोरोना टेस्ट कराया जाएगा। महिला ने यह भी बताया कि रिपोर्ट आने के 30 घंटे बाद तक उसका घर सील नहीं गया और न ही सैनिटाइज किया गया। द फॉलोअप को एक और व्यक्ति ने बताया कि उसने कोरोना का टेस्ट करवाया लेकिन टेस्ट करवाने के लिए उसे काफी मशक्कत करनी पड़ी। उस व्यक्ति के अनुसार अगर आपके पास मजबूत पैरवी नहीं है तो कोरोना का टेस्ट करवाना बहुत मुश्किल है।
रांची के हालात और भी भयावह
राजधानी रांची के हालात और भयावह हैं। रिम्स के कोविड वार्ड और CCL का अस्पताल फुल है। दोनों जगह मिलाकर कोरोना मरीजों के लिए करीब 150 बेड थे। सभी भरे पड़े हैं। राहत की बात ये है कि पारस अस्पताल के 50 बेड अभी तक खाली है। हालांकि सिस्टम की खामी कहिए या कुछ और पारस अस्पताल में बेड रहने के बावजूद वहां कोरोना मरीजों को भर्ती कराने के बजाय रिम्स और CCL रेफर किया जा रहा है। अब तो हालात ऐसे होते जा रहे हैं कि दिल्ली की तरह अब झारखंड में भी कोरोना के मरीजों को होम क्वारंटाइन रहने की सलाह दी जाने लगी है। रांची के सिविल सर्जन बीबी प्रसाद ने बताया कि कोरोना मरीजों के लिए घर में ही व्यवस्था की जाएगी।
देश से ज्यादा कोरोना मरीजों की रफ्तार
स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार झारखण्ड में अबतक 186767 सैंपल लिए गए हैं, जिसमें 180439 टेस्ट किये गए। इनमें से 3760 सैम्पल पॉजिटिव पाए गए हैं तो 176679 निगेटिव। स्वास्थ्य विभाग के जारी आंकड़े और रिपोर्ट के अनुसार झारखण्ड में कोरोना संक्रमित मरीजों की रफ़्तार देश से अधिक है। 12 जुलाई को जारी आंकड़े के मुताबिक पिछले 7 दिनों में कोरोना का ग्रोथ रेट भारत में 3.43 प्रतिशत रहा है जबकि झारखंड में 4.16 प्रतिशत। वहीँ रिकवरी रेट में भी झारखण्ड पीछे है। आंकड़े के अनुसार भारत में रिकवरी रेट 62.92 प्रतिशत है जबकि झारखण्ड में 61.38 प्रतिशत है।