द फॉलोअप टीम, रांची:
डिप्रेशन का तात्पर्य दुख से होता है। यह समस्या व्यक्ति को किसी भी वजह से हो सकती है। नाकामयाबी, प्रेम में धोखा या जटिलता, अकेलापन, नौकरी का तनाव या गंभीर शारीरिक बीमारी डिप्रेशन की वजह बन सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक़ डिप्रेशन एक आम मानसिक बीमारी है। डिप्रेशन आमतौर पर मूड में होने वाले उतार-चढ़ाव और कम समय के लिए होने वाले भावनात्मक प्रतिक्रियाओं से अलग है। लगातार दुखी रहना और पहले की तरह चीज़ों में रुचि नहीं होना इसके लक्षण हैं।
डिप्रेशन गंभीर मानसिक बीमारी
डिप्रेशन बहुत ही गंभीर बीमारी है। इसमें व्यक्ति का मानसिक स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो जाता है और भविष्य अंधकार मय दिखने लगता है। व्यक्ति भावनात्मक तौर पर कमजोर हो जाता है और उसमें रचनात्मक क्षमता का ह्रास होने लगता है। डिप्रेशन से पीड़ित इनसान खुद को बेहद अकेला और असहाय महसूस करता है। उसे जिंदगी में खुशी महसूस नहीं होती, निराशा उस पर पूरी तरह से हावी रहती है।

कैसे करेंगे डिप्रेशन की पहचान
डेली मेल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक कनाडा के एक मेडिकल स्टूडेंट और मोटिवेशनल स्पीकर जाचेरी डेरेनियोस्की ने एक ऐसा तरीका इजाद किया है जिसके आधार पर किसी व्यक्ति में डिप्रेशन की आशंका को पहचानने में मदद मिलेगी। इससे प्रभावित व्यक्ति को समय से पहले डिप्रेशन से बचाया जा सकता है। ये पांच लक्षण हैं जिसके आधार पर किसी व्यक्ति में डिप्रेशन के लक्षण की पहचान की जा सकती है।

इस आधार पर पहचानें किसे है डिप्रेशन
-अगर कोई व्यक्ति हमेशा यह कहे कि वह थका हुआ है तो समझिए कि उसमें डिप्रेशन का हमला होने वाला है।
-डायवोर्स या बेरोजगारी जैसी कठिन स्थितियों का सामना करने वाला भी डिप्रेशन का शिकार हो जाता है। ऐसे व्यक्ति में यदि सामान्य से अलग व्यावहार दिखे तो समझिए वह डिप्रेशन में आ चुका है।
-अगर कोई व्यक्ति लगातार यह कहे कि वह बहुत व्यस्त है और वो बेकार की चीजों के साथ वक्त गुजारता है तो उसमें डिप्रेशन की आशंका बहुत ज्यादा है।
-अगर कोई व्यक्ति हमेशा चीजों में उलझा रहे। उसका व्यवहार बहुत रूखा हो और भावनात्मक रूप से उदास रहता हो तो वह व्यक्ति डिप्रेशन में आ चुका है।
-अगर कोई व्यक्ति बातचीत में कम दिलचस्पी लेने लगे, खासकर उन बातचीत में जिनको लेकर पहले वह खूब बातचीत करता था, तो ऐसे व्यक्ति में डिप्रेशन की आशंका ज्यादा है।
-जाचेरी डेरेनियोस्की के मुताबिक इन लक्षणों के आधार पर किसी व्यक्ति में डिप्रेशन को पहचाना जा सकता है। ऐसी स्थितियों में उस व्यक्ति के आस पास के लोगों को समय रहते उन्हें इलाज करवाने के लिए प्रेरित करना चाहिए। इससे वह बहुत बड़ी परेशानी से बच सकते है।

भारत के आंकड़े डराने वाले है ।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक वर्ष 2015 मे भारत मे 5 करोड़ रोगी थे। दक्षिण एशियाई देशों मे डिप्रेशन के अधिकांश मरीज भारत मे रहते हैं। भारत मे 3 करोड 80 लाख लोग घबराहट के शिकार हैं। यही कारण है कि भारत मे आत्महत्या दर सब से अधिक है। जानकरी के मुताबिक भारत में प्रति 45 सेकेंड में एक व्यक्ति की मौत डिप्रेशन की वजह से हो जाती है।