द फॉलोअप टीम, रांची:
राज्य में बंद पडी फैक्ट्रियों के रिवाईयल पर सरकार की चिंता सराहनीय है। निश्चित ही यह प्रयास राज्य में औद्योगिकीकरण के द्वार खोलेगा। इसी दिशा में 27-28 अगस्त को दिल्ली में निवेशक सम्मेलन का आयोजन साकारात्मक प्रयास है किंतु उचित होता, इस सम्मेलन का आयोजन झारखंड में ही राज्य के स्थानीय उद्यमियों के साथ किया जाता।
मोंमेटम झारखंड को विफल होते देखा
मोमेंटम झारखंड को हमने विफल होते देखा है। क्या इस विफलता की समीक्षा हुई ? हमारा मानना है कि इसका मुख्य कारण सरकार की योजनाओं के अनुरूप योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं होना तथा इसमें स्थानीय उद्यमियों एवं औद्योगिक संगठनों की सहभागिता नहीं होना ही है। इस प्रयास में केवल निवेशकों को बुलाने की कोशिश मात्र ही हो पाई।
उद्यमियों की बैठक में खानापूर्ति की गई
अभी फिर सरकार ने स्थानीय उद्यमियों को नजरअंदाज कर प्रदेश से बाहर में निवेशक सम्मेलन का आयोजन किया है। मार्च माह में भी दिल्ली में स्टेकहोल्डर्स मीट का आयोजन किया गया था। उसके उपरांत स्थानीय उद्यमियों एवं संगठनों के दबाव से उद्योग विभाग द्वारा रांची में भी स्टेकहोल्डर्स मीट का आयोजन कर केवल खानापूर्ति की गई। उसी बैठक में उद्योग सचिव महोदया ने स्थानीय उद्यमियों की समस्याओं के समाधान के लिए फेडरेशन चैंबर और अन्य औद्योगिक संगठनों के साथ बैठक करने की बात कही थी पर उसके बाद से अब तक 5-6 बैठके निर्धारित करके, उन सभी बैठकों को स्थगित कर दिया गया। मतलब स्पष्ट है कि उद्योग विभाग द्वारा स्थानीय इकाईयों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है जो राज्य में औद्योगिकीरण के लिए अच्छे संकेत नहीं है।
उद्यमियों की कुछ वर्तमान समस्याएं जिनपर सरकार को शीघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है
1. एक तरफ राज्य सरकार द्वारा बंद फैक्ट्रियों के रिवाईवल का प्रयास किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर विभागीय अधिकारियों द्वारा चलंत उद्योगों को बंद करने की दिशा में कार्रवाई की जा रही है। उदाहरण के तौर पर फैक्ट्री लाईसेंस के रिन्यूअल और पॉल्यूशन बोर्ड से कैसेंट टू ऑपरेट मिलने में हो रहे विलंब से उद्यमी परेशान हैं। यदि श्रम विभाग और पॉल्यूशन बोर्ड से उद्यमियों को ऐसे ही समस्याएं होती रहीं तो बंद पड़े उद्योगों का सरवाईवल तो दूर चल रहे उद्योग भी बंदी के कगार पर आ जायेंगे। इंस्पेक्टर ऑफ फैक्ट्री कार्यालय द्वारा फाइल क्लियर नहीं किये जाने की शिकायतें नियमित रूप से हमारे संज्ञान में आ रही हैं।

2. एसपियाडा के अंतर्गत देवीपुर औद्योगिक क्षेत्र में दो वर्षों से भी अधिक अवधि से उद्यमियों को आवंटित 81 प्लॉटों में से आज तक एक भी उद्यमी को आवंटित प्लॉट पर एसपियाडा द्वारा दखल नहीं दिलाया जा सका है। ऐसे में उद्यमी प्लॉट आवंटन में पूंजी लगाकर लंबे समय से उद्योग लगाने की जगह खाली हाथ बैठे हैं और बड़ी राशि के रूप में पूंजी फंसे होने की पीड़ा से पीडित हैं। राज्य सरकार को इस मामले में शीघ्र संज्ञान लेने की आवश्यकता है।
3. औद्योगिक क्षेत्र की आधारभूत संरचना को विकसित करने हेतु पिछले कई वर्षों से राज्य के औद्योगिक संगठनों द्वारा आवाज उठाई जाती रही है। चिंतनीय है कि अब तक इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं की जा सकी है।
राज्य में निर्मित नीतियां अच्छी होने के बावजूद निवेशकों में आत्मविश्वास का अभाव रहता है. जिसका मुख्य कारण पॉलिसी का सुचारू रूप से क्रियान्वयन नहीं होना है। उदाहरण के तौर पर पॉलिसी के तहत यूनिट्स को दी जानेवाली निर्धारित सब्सिडी का समयबद्ध डिसबर्समेंट और अप्रूवल नहीं होने से आर्थिक रूप से यूनिट को समस्या होती है। चैंबर के पास ऐसे कई उद्यमियों की शिकायतें मिली हैं, जिन्हें उन्हें अपने निवेश के बाद वर्ष 2016 से सब्सिडी की किस्त डिस्बर्स नहीं की गई है।

5. सर्वविदित है कि किसी भी वाणिज्यिक वाहन को सड़क पर चलाने के लिए CMVR Rule 62 के तहत दुरुस्ती प्रमाण पत्र निर्गत कराना होता है जो 15 प्रकार की तकनीकी जांच के अनुरूप निर्गत किये जाते हैं। सारे तकनीकी जांच भारी उपकरणों का इस्तेमाल कर किये जाते हैं। इन्हीं सभी मूलभूत सिद्धांतों के अनुरूप राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर आरंभ किया गया है। MORTH-56 में स्पष्टतः उल्लिखित है- Provided further no certificate of fitness shall be granted to a Vehicle rather it will be taken from Automated Fitness Centre. माननीय उच्च न्यायालय ने भी यह दिशा-निर्देश जारी किया है कि जहां भी ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर स्थापित हैं, वहां मोटरयान निरीक्षक किसी भी तरह से दुरुस्ती प्रमाण पत्र निर्गत नहीं करेंगे। किंतु जमशेदपुर में ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर स्थापित होने के बावजूद MVI द्वारा दुरुस्ती प्रमाण पत्र मैनुअली निर्गत किया जा रहा है जिस कारण ऑटोमेटेड फिटनेस सेंटर में वाणिज्यिक वाहनों का आवागमन कम हो गया है। ऐसे में कोई निवेशक क्यों राज्य में निवेश के लिए ईच्छुक होगा।
6. उद्योग सचिव महोदया कभी किसी औद्योगिक क्षेत्र में गई भी है ? वह सितम्बर 2020 से विभाग की सचिव हैं, पर हमारे उद्यमी तो 50 साल से भी अधिक वर्षों से उद्योग चला रहे हैं। हम उनके एवं उनके विभाग को पुनः न्यौता देते हैं कि वह आयें और राज्य के औद्योगिकीकरण की दिशा पर हमसे संवाद करें।