द फॉलोअप टीम, रांची
झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे और आखिरी दिन मंगलवार को महगामा विधायक दीपिका सिंह किसान विरोधी बिल के खिलाफ ट्रैक्टर से विधानसभा पहुंची। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सदन के बाहर और अंदर विरोध-प्रदर्शन का नजारा देखने को मिला। विधानसभा के बाहर झामुमो और कांग्रेस का प्रदर्शन कृषि बिल के खिलाफ दोनों पार्टी के विधायकों ने प्रदर्शन किया। वहीं सदन की कार्यवाही शुरू होते ही दस हजार आदिवासी-मूलवासी लोगों की नौकरी जाने का मामला उठाया गया। इसपर भाजपा विधायकों ने सदन में जोरदार हंगामा किया। हंगामे को देखते हुए स्पीकर ने 12.30 बजे तक के लिए सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी।
सत्तापक्ष के विधायकों का जोरदार प्रदर्शन
किसान विरोधी बिल के खिलाफ सत्तापक्ष के विधायकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। हाथों में तख्ती लेकर जेएमएम और कांग्रेस के विधायकों ने केंद्र सरकार के खिलाफ धरना दिया। झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष सह वित्त मंत्री डॉ रामेश्वर उरांव, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश ठाकुर, ममता देवी, समेत अन्य विधायकों ने केन्द्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
किसानों के खिलाफ खड़ी है केंद्र सरकार : डॉ. उरांव
सदन के बाहर किसान विरोधी बिल का विरोध करते हुए झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और मंत्री डॉ. रामेश्वर उरांव ने द फॉलोअप से बात करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार किसानों के खिलाफ खड़ी है। किसानों की भावना से उन्हें कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि ये फैसला हिंदुस्तान के इतिहास में काली स्याही से लिखा जाएगा। किसानों और राज्यों के खिलाफ इस कानून का कांग्रेस कार्यकर्ता पूरे राज्य में व्यापक विरोध करेंगे।
ये गुंडागर्दी की जगह नहीं है: स्पीकर
बता दें कि 11.30 बजे दिन तक की सदन की कार्यवाही के दौरान सीएम हेमंत सोरेन नहीं पहुंचे थे। इस बीच विपक्ष के कई सदस्य वेल में पहुंच कर हंगामा करने लगे। स्पीकर रवींद्र नाथ महतो ने सभी को अपनी सीट पर बैठने को कहा। स्पीकर ने कहा कि ऐसे सदन नहीं चल सकता, इसपर विधायक रंधीर सिंह ने इसका प्रतिकार करते हुए कहा कि ऐसे ही चलेगा। स्पीकर ने कहा कि ये गुंडागर्दी की जगह नहीं है। उन्होंने मार्शल के सहारे सदन से बाहर निकाला गया। काफी देर हंगामा होने के बाद नियोजन नीति पर फिर टोका-टोकी शुरू हुई।
दस हजार लोगों की नौकरी का सवाल है
प्रदीप यादव ने कहा कि ये पिछली सरकार की कारस्तानी है। इसपर फिर एक बार हंगामा होने लगा। भाजपा के विधायक रामचंद्र चंद्रवंशी ने कहा कि दस हजार लोगों की नौकरी का सवाल है। उन्होंने इसपर सीएम से वक्तव्य दिलाने पर जोर दिया। विपक्ष को शांत करते हुए स्पीकर ने कहा कि तबतक अमर बाउरी द्वारा उठाए सवाल का संसदीय कार्यमंत्री आलमगीर आलम जी से जवाब तो सुन लीजिए। वह बोलने के लिए खड़े हुए लेकिन उनकी बातों को इग्नोर कर दिया।
सरकार को ऊपरी अदालत में जाना चाहिए : भानु प्रताप
सदन में भाजपा के विधायक भानु प्रताप शाही ने कहा कि सरकार 1932 के खतियान को लागू करने की बात करती है। वहीं पिछली सरकार के 1985 को आधार मानने को तैयार नहीं है। उन्होंने कहा कि यह तय है कि झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद 10 हजार लोगों की नौकरी जाना तय है। उन्होंने यह भी कहा कि मैं मानता हूं कि सदन में ये चर्चा का विषय नहीं है। नियोजन नीति भी अलग विषय है। लेकिन जब सरकार द्वारा किसी अधिकारी के ऊपर सुप्रीम कोर्ट में विषय रखा जाता है, तो हरीश साल्वे जैसे बड़े वकील उनकी पैरवी के लिए रखे जा सकते हैं, तो इस मामले में सरकार ऊपर की अदालत में क्यों नहीं जा सकती है? क्योंकि यहां 10 हजार आदिवासी-मूलवासी के नियोजन का सवाल है। इसपर सीएम का जवाब आना चाहिए।