द फॉलोअप टीम, रांची
झारखंड के मनरेगाकर्मियों की हड़ताल 31वें दिन भी जारी रही। राज्य भर के मनरेगा कर्मी अपने-अपने जिला मुख्यालय में एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते नजर आए। इस दौरान मानव श्रृंखला बना कर भी विरोध जाहिर किया गया। झारखंड के मनरेगाकर्मियों के समर्थन में देश भर के मनरेगा कर्मी भी आगे आए हैं। आज उन्होंने कलमबंद हड़ताल की और कल यानी 27 अगस्त को भी सभी हड़ताल पर रहेंगे।कुल मिलाकर अब यह आंदोलन राष्ट्रव्यापी बनता जा रहा है। कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक होगा, क्योंकि अन्य कर्मचारी संगठन भी संपर्क में हैं, जो मनरेगा कर्मचारी संघ का समर्थन करना चाहते हैं। संघ ने कहा कि मनरेगा कर्मचारी संघ द्वारा बार-बार सकारात्मक वार्ता के लिए सरकार तथा विभाग से आग्रह किया जा रहा है, किंतु विभागीय अधिकारियों की हठधर्मिता एवं अड़ियल रवैये की वजह से अभी तक सकारात्मक वार्ता नहीं हो पायी है। विभागीय अधिकारियों द्वारा शुरू से ही आंदोलन को कुचलने का काम किया गया है। बर्खास्तगी की धमकी तथा अल्टीमेटम भी दिया गया है, हड़ताल के दौरान मनरेगा कर्मियों को डराने के लिए प्रदेश अध्यक्ष तथा धनबाद के जिला अध्यक्ष को बर्खास्त कर दिया गया। हड़ताल के दौरान यह कार्रवाई गलत मंशा से आंदोलन को कमजोर करने के उद्देश्य से किया गया है, लेकिन सरकार के इन पैतरों से मनरेगा कर्मी तनिक भी भयभीत नहीं हैं। संघ ने कहा कि इस बार आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
डरनेवाले नहीं हैं मनरेगाकर्मी-संघ
संघ ने कहा कि विभाग को अपने नापाक इरादे में कभी कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। मनरेगा कर्मी असली झारखंडी हैं, और ये डरनेवाले नहीं लड़ने वाले हैं। विभागीय अधिकारी अखबार में आकस्मिकता मद से सम्बंधित बेतुका बयान देकर मनरेगा कर्मियों और सरकार दोनों को गुमराह करने का कार्य कर रहे हैं, जबकि सच्चाई ये है कि पिछले 3 वर्षों में आकास्मिता मद का केवल 36 से 65 प्रतिशत ही मनरेगा कर्मियों की सैलरी में खर्च हुआ है। इस तरह केवल आकास्मिता मद से ही मनरेगा कर्मियों का वेतन दोगुना किया जा सकता है। आकस्मिकता मद का मुद्दा मनरेगा कर्मियों के स्थायीकरण के मुद्दे से भटकाने का प्रयास है। परंतु संघ का कहना है कि हमारी हड़ताल अपनी मुख्य मांगों की पूर्ति के लिए है। जिसमें स्थायीकरण और सामाजिक सुरक्षा जैसे मद्दे प्रमुख हैं।13 वर्षो से मनरेगा और ग्रामीण विकास के अन्य कार्यो को करने के बाद सरकार को चाहिए कि जल्द ही सभी मनरेगा कर्मी को स्थायी करे।
वास्तविक मजदूरों को कार्य देने में 60 से 70 प्रतिशत की गिरावट
संघ ने कहा कि राज्य भर में वास्तविक मजदूरों को कार्य देने में 60 से 70 प्रतिशत की गिरावट आई है। विभागीय दबाव से केवल मनरेगा सॉफ्ट में मजदूरों की डिमांड करायी जा रही है, परंतु वास्तविक मजदूर नहीं रहने के कारण मानव दिवस का सृजन नहीं हो रहा है। ऑनलाइन प्रतिवेदन से ज्ञात होता है कि जुलाई 2020 में (जब मनरेगा कर्मी हड़ताल में नही थे) पूरे राज्य में लगभग 94 लाख मानव दिवस का सृजन किया गया था। परंतु अगस्त 2020 में आज तक लगभग 27 लाख मानवदिवस का सृजन हुआ है। यह दर्शाता है कि केवल एक महीने में मानव दिवस के सृजन में लगभग 70 प्रतिशत की गिरावट आई है इससे यह भी साबित होता है कि विभाग के दबाव में अधिनस्त कर्मियों/पदाधिकारियों द्वारा केवल आंकड़ा दिखाने के लिए फर्जी डिमांड करायी जा रही है।
1 सितंबर को मंत्री करेंगे वार्ता
मीडिया के माध्यम से माननीय ग्रामीण विकास मंत्री जी का बयान आया है कि 01.09.20 को मनरेगा कर्मियों के साथ वार्ता करेंगे। हम इसका स्वागत करते हैं, परंतु जब तक सकारात्मक वार्ता नहीं हो जाती है, तबतक राज्य भर के मनरेगा कर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डंटे रहेंगे।