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Jharkhand: नक्सलियों ने जंगल में बिछा रखा है 150 IED बम, सर्च ऑपरेशन में डिफ्यूज किये गए 45 बम

Jharkhand: नक्सलियों ने जंगल में बिछा रखा है 150 IED बम, सर्च ऑपरेशन में डिफ्यूज किये गए 45 बम

द फॉलोअप टीम, चाईबासा:

पहाड़ियों से घिरे सारंडा और पोड़ाहाट जंगल को नक्सलियों ने अपना गढ़ बना लिया है। इस जगह को नक्सलियों का सेफ जोन कहा जाता था।  हालांकि सुरक्षा बलों की लगातार छापेमारी और मुठभेड़ के कारण नक्सली अब यहां से भी दूसरी ओर रुख करने लगे हैं। सुरक्षाबलों को नुकसान पहुंचाने की साजिश नाकामयाब हो रही है। एसपी अजय लिंडा ने बताया कि सुरक्षा बल को नुकसान पहुंचाने के लिए उग्रवादियों ने पोड़ाहाट जंगल में 150 से अधिक आईईडी और पाइप बम बिछा रखे हैं।

इस बात की सूचना पर जब पुलिस और सीआरपीएफ ने सर्च ऑपरेशन किया।  अभियान के दौरान तीन दिन में 14 बम मिले है जिसे डिफ्यूज कर दिया गया।  यहां अब तक 45 आईईडी पाइप और केन बम भी मिले हैं। समय रहते सभी बमों को डिफ्यूज कर दिया गया नहीं तो सुरक्षा बालों को भारी क्षति हो सकती थी। बम मिलने की यह खबर गुदड़ी थाना क्षेत्र से आयी है। 

छत्तीसगढ़ से हो रहे प्रेरित 
पुलिस को नुकसान पहुंचाने के लिए नक्सलियों द्वारा अब नया हथकंडा अपनाया जा रहा है। नक्सली अब छत्तीसगढ़ के नक्सलियों से प्रेरित होकर ही योजना बना रहे हैं। बम को पत्थर के नीचे  बिछा रहे हैं ताकि पुलिस की नजर इसपर ना पड़े। इस तरह के हथकंडे  छत्तिसगढ़ के उग्रवादी अपनाते हैं। कोल्हान में नक्सली तीर बम का ही इस्तेमाल करते थे। डोंगेबेड़ा जंगल पहाड़ी क्षेत्र से  चाईबासा पुलिस और सीआरपीएफ को चार आईईडी, केन बम, डेटोनेटर, सेफ्टी फ्यूज, बैटरी मिला है। 

हर महीने मिले है बम 
इस साल बम मिलने की अगर बात करें तो लगभग हर महीने ही नक्सलियों के अड्डे से बम बरामद किया गया यही। जनवरी 1 पाइप बम, 3 तीर बम मिले थे। फ़रवरी में 1 हैंड ग्रेनेट, 22 केन बम, 4 सिलेंडर बम, 2 आईईडी केन ड्रम बम, 2 आईईडी केन बम मिले थे। वहीँ मार्च में 3 केन बम, 1 पाइप बम अप्रैल में 1 आईईडी बम, 3 केन बम। मई में 2 केन बम। सिर्फ जून ही एकमात्र महीना था जब एक भी बम बरामद नहीं किये गए थे। वही जुलाई में 1 आईईडी बम मिला था।