द फॉलोअप टीम, रांची
स्वास्थ्य विभाग में 50 करोड़ रुपये से अधिक की गैरजरूरी दवाओं की खरीद और उसे गोदाम में सड़ाने के मामले की जांच एसीबी ने शुरू होने से विभाग में हड़कंप मच गया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश पर एसीबी ने इस मामले में पीई दर्ज की है। 20 सितंबर को सीएम ने 50 करोड़ की गैरजरूरी दवाओं की खरीद व उसकी बर्बादी के मामले में एसीबी जांच के आदेश दिए थे। 17 दिसंबर 2018 को मीडिया रिपोर्ट्स में दवाओं की खरीद व सड़ने की खबरें आयी थीं।
पूर्व अधिकारियों को बनाया गया है आरोपी
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के आदेश के बाद इस मामले में स्वास्थ्य विभाग से भी जांच के संबंध में मंतव्य की मांग की गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच संबंधी मंतव्य एसीबी को भेजा है, इसके बाद एसीबी ने पीई दर्ज की है। एसीबी ने पीई में झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन अधिकारियों व कर्मियों को आरोपी बनाया है।
एक्सपायरी डेट तीन से छह माह ही थी
झारखंड में साल 2007-09 के बीच झारखंड मेडिकल एंड हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने दवाइयों की खरीद की थी। तब खरीदी गई दवाओं की एक्सपायरी डेट तीन से छह माह ही थी। हर्बल मेडिसीन व अन्य दवाओं को भी बगैर जरूरत के ही खरीद ली गई थी। फंसने के डर से अधिकारियों ने बाद में दवाओं को बिना जरूरत के ही जिलों में भेज दिया था। एनआरएचएम को वापस की गई दवाओं को नामकुम के वेयर हाउस में रखा गया था, जहां ये दवाइयां एक्सपायरी होकर सड़ गई थीं। बीते साल तत्कालीन स्वास्थ्य निदेशक ने दवाइयों को नष्ट करने के संबंध में आदेश मांगा था। तब मामला सामने आया था।
जिलों ने वापस कर दी थी दवाएं
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के रूटीन इम्यूनाइजेशन सेल के द्वारा बताया गया था कि आईफेपिन यानी आयरन फोलिक एसिड टैबलेट जूनियर की जरूरत नहीं है। इसके बावजूद 20 करोड़ की टैबलेट की खरीद की योजना बना ली गई थी। स्वास्थ्य विभाग ने साल 2018 में ही आईएफए सिरप की भी खरीद की थी, जिसकी एक्सपायरी डेट मई 2019 थी। शार्ट एक्सपायरी डेट होने के कारण इस दवा को भी कई जिलों ने लेने से इंकार कर दिया था। बता दें कि साल 2017 में श्रावणी मेले के दौरान भी 1.10 करोड़ रुपये की 24.71 लाख एमोक्सीलिन टैबलेट दवा बर्बाद हो गई थी। इस दवा की सप्लाई उसी साल मार्च में हुई थी।
सीएम ने दिया था जांच का आदेश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 20 सितंबर को इस मामले में एसीबी जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री ने अपने आदेश में कहा था कि यह मामला दवाइयों के रखरखाव से संबंधित एवं जिलों में आपूर्ति जैसे नीतिगत विषय के अंतर्गत आता है। स्वास्थ्य विभाग ने बेवजह गैर जरूरी दवाएं क्यों खरीद ली, फिर ये दवाएं कैसे सड़ गईं, यह गंभीर मामला है।