द फॉलोअप, रांची
केंद्र सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने झारखंड की लगभग 10 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को अस्वीकृत (De-sanction) कर दिया है। केंद्र सरकार ने समय पर जमीन का अधिग्रहण नहीं किए जाने, परियोजना निर्माण में राज्य सरकार की शिथिलता बरतने और समय पर अन्य तकनीकी स्वीकृति में विलंब को इसका आधार बनाया है। इतना ही नहीं सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने विभिन्न सड़क परियोजनाओं में हुई लापरवाही, भुगतान में देरी और कई अन्य शर्तों का पालन नहीं करने के लिए राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग पर लगभग 100 करोड़ का दंड भी लगाया है। यहां मालूम हो कि केंद्र सरकार के MORTH ने राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ी लगभग 15 हजार करोड़ की परियोजनाओं को स्वीकृति दी थी। उसमें अब 10 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं को अस्वीकृत किया गया है।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार जिन महत्वपूर्ण सड़कों के निर्माण को अस्वीकृत किया गया है, उनमें हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु सड़क, हजारीबाग-बगोदर सड़क व अन्य सड़क शामिल है। इसके अलावा चाईबासा-हाटगम्हरिया एनएच पर 6 नंबर आरओबी के निर्माण को भी अस्वीकृत कर दिया गया है। इसमें हाटगम्हरिया-नोवामुंडी-बराइबुरु, वही सड़क है जिसके निर्माण को लेकर राज्य में सरकार बदल गयी थी। हालांकि इस सड़क का निर्माण उस समय इतनी मजबूती से हुई कि आज 17 वर्षों में उसकी मरम्मति पर कोई राशि खर्च नहीं करनी पड़ी। जानकारी के अनुसार इस सड़क के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण का काम दो साल पहले आवंटित किया गया था। लेकिन समय पर जमीन का अधिग्रहण, फॉरेस्ट क्लियरेंस व अन्य तकनीकी स्वीकृतियों के नहीं मिलने के कारण यह सड़क भी लटक गयी।
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जानकारी के अनुसार केंद्रीय (MORTH) ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के पथ निर्माण विभाग और उसके इंजीनियर सही ढंग से कार्य नहीं कर रहे। अनुबंध की शर्तों का सही पालन नहीं हो रहा। संवेदकों को समय पर भुगतान नहीं होने के कारण मामला हाईकोर्ट तक पहुंचता है। वेबजह केंद्र सरकार को अतिरिक्त राशि का भुगतान करना पड़ता है। इसके लिए केंद्र सरकार ने राज्य के पथ निर्माण विभाग पर 100 करोड़ का दंड भी अधिरोपित किया है।
