द फॉलोअप डेस्क:
बिहार (Bihar) के भागलपुर (Bhagalpur) जिला शिक्षा विभाग में 98.12 लाख रुपये की सरकारी राशि के कथित गबन के मामले में कार्रवाई तेज हो गई है। फर्जी शिक्षिका की आईडी (ID) बनाकर वेतन मद में सरकारी राशि के भुगतान के मामले में स्थापना शाखा के निम्न वर्गीय लिपिक जफर अली को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, तत्कालीन डीपीओ (DPO) स्थापना शशि चंदन चौधरी (Chandan Chaudhary) के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने के लिए प्रपत्र क गठित किया गया है। निदेशक प्रशासन के निर्देश पर क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक (RDDE) सुभाष कुमार गुप्ता ने यह कार्रवाई की है। विभागीय जांच में सामने आया कि फर्जी विशिष्ट शिक्षिका तनुश्री की आईडी तैयार करने के लिए जफर अली की मेकर आईडी का इस्तेमाल किया गया था।

बैक डेट में बनी फर्जी आईडी, वेतन मद से हुआ भुगतान
जांच के अनुसार, विभागीय ऑपरेटर अविनाश राज ने 29 मार्च 2026 को बैक डेट में वर्ष 2025 की ऑनबोर्डिंग प्रक्रिया पूरी कर फर्जी शिक्षिका की आईडी तैयार की थी। आरोप है कि इस प्रक्रिया में जफर अली की मेकर आईडी का इस्तेमाल किया गया, जिसके बाद उक्त आईडी के माध्यम से वेतन मद में सरकारी राशि का भुगतान किया गया। इस पूरे मामले में 98.12 लाख रुपये के कथित गबन का खुलासा हुआ है। इससे पहले जिला शिक्षा पदाधिकारी चंदन कुमार और तत्कालीन डीपीओ स्थापना शशि चंदन चौधरी को भी निलंबित किया जा चुका है। अब तत्कालीन डीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने से मामले में अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की जांच आगे बढ़ेगी।

ऑपरेटर जेल में, नामजद लिपिक की तलाश
मामले में विभागीय ऑपरेटर अविनाश राज जेल में बंद है, जबकि नामजद लिपिक शिशिर कुमार झा अब भी फरार बताया जा रहा है। विभाग अब फर्जी आईडी बनाने से लेकर उसके सत्यापन और वेतन भुगतान तक की प्रक्रिया में शामिल लोगों की जिम्मेदारी तय करने में जुटा है। मेकर आईडी के इस्तेमाल और डिजिटल रिकॉर्ड के सत्यापन में कथित गड़बड़ी ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल, लिपिक के निलंबन और तत्कालीन डीपीओ के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू होने से इस मामले में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया तेज हो गई है।