द फॉलोअप डेस्क
बिहार में बालू माफियाओं पर राज्य के उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बड़ा एक्शन लिया है। उन्होंने गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि राज्य के 78 बालू घाटों के सरेंडर के पीछे सुनियोजित साजिश थी, जिससे विभाग को करीब 700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। आगे उन्होंने कहा कि कई संवेदकों ने निविदा के समय मनचाहा बोली लगाकर घाट अपने नाम कराया था, लेकिन अवैध खनन पर जब सख्ती की गई तो अब वे घाट सरेंडर कर रहे हैं। इस पर उपमुख्यमंत्री ने चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसे सभी संवेदकों की सुरक्षा राशि जब्त की जाएगी और भविष्य की निविदाओं में उन्हें भाग लेने से भी रोका जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में बालू माफियाओं के खिलाफ अभियान तेज कर दिया गया है। उन्होंने मीडिया से जानकारी साझा करते हुए कहा कि अप्रेल से नवंबर 2025 के बीच 31,997 छापेमारी की गई है। जिसमें 1600 से अधिक एफआईआर दर्ज हुए साथ ही इस मामले में 400 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी भी की गई। उन्होंने थाना को भी निर्देश देते हुए कहा कि माइंस ऑफिसर की अनुमति के बिना अपने क्षेत्र से गुजरने वाले खनन वाहनों को बेवजह परेशान नहीं करना है। खनन पर निगरानी बढ़ाने के लिए कई रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं और जहां शिकायतें मिली हैं वहां भी जल्द कैमरे लगाए जाएंगे।

उन्होंने सख्त आदेश देते हुए कहा कि बंद किए गए घाटों से अगर कोई बालू निकालते पाया गया तो उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। साथ ही आसपास चल रहे घाटों पर भी निगरानी की जिम्मेदारी तय की गई है। उन्होंने आगे कहा कि सरकार बंद पड़े घाटों को फिर से चालू कराने की कोशिश करेगी। जो घाट चालू नहीं हो पाएंगे, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा ईंट-भट्ठों और बालू घाटों पर काम करने वाले मजदूरों के लिए पहचान पत्र अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि इस बीच उपमुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (X) पर पोस्ट भी किया। पोस्ट कर बताया कि अवैध खनन के खिलाफ जनभागीदारी बढ़ाने के लिए 72 सजग नागरिकों को 'बिहारी खनन योद्धा' पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। इसके तहत कुल 3.70 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि ऑनलाइन दी गई। उन्होंने सरकार की योजना की भी जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के तहत अवैध खनिज से लदे ट्रैक्टर को पकड़वाने पर 5,000 रुपये और ट्रक या बड़े वाहन को पकड़वाने पर 10,000 रुपये का इनाम दिया जाता है।