द फॉलोअप डेस्क
बिहार में जैसे-जैसे ठण्ड बढ़ रही है वैसे-वैसे विधानसभा चुनाव में सियासी गर्मियां भी तेज हो रही है। सभी पार्टियाँ अपने उम्मीदवारों की सूची लगातार जारी कर रहा है। इसी बीच कई बड़ी खबरे आ रही हैं, जहां वर्तमान के विधायकों का टिकट काट कर नये चेहरों को मौका दिया जा रहा है। जिसके कारण कई विधायक विरोध और धरना प्रदर्शन करने पर उतर आये हैं। .jpeg)
इसी बीच भाजपा प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य अजय झा ने नरपतगंज विधानसभा क्षेत्र से पार्टी का टिकट नहीं मिलने से दुखी होकर गुरुवार को अपने आवास पर आत्मदाह करने का प्रयास किया है। हालंकि उनके समर्थकों ने इसे यह कदम उठाने से रोक लिया है। उन्होंने इस दौरान कफ़न ओढ़ कर मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनके साथ अन्याय हुआ है।.jpg)
उन्होंने 1985 से यूथ कांग्रेस से अपनी राजनीतिक सफ़र की शुरुआत की थी। लेकिन पिछले 25 साल से भाजपा में रहकर पार्टी के लिए काम किया है। लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार सरकार के मंत्री मंगल पांडे, केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ दिलीप जायसवाल ने उन्हें भरोसा दिया था कि लोकसभा में आप भाजपा प्रत्याशी को जिता कर दिल्ली भेजिए, फिर आने वाले विधानसभा में आपको मौका दिया जाएगा।
अजय सिंह ने आरोप लगाते हुए कहा कि "आश्वासन देने के बाद उन्हें टिकट नहीं दिया गया। इससे वह बहुत आहत हुए हैं। उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्हें नरपतगंज से टिकट मिलेगा। लेकिन चार दिन पहले ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष ने जोकीहाट से टिकट देने की बात कही थी। लेकिन वहां भी उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया गया। अब कफ़न ओढ़ लिया हूं, कभी भी कुछ कर सकता हूं।" वहीं अजय झा की पत्नी संजू झा ने कहा कि "उनके पति तन-मन और धन से बीजेपी के साथ रहे। लेकिन चुनाव का वक्त जब आता है तो उन्हें दरकिनार कर दिया जाता है।
उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि "अगर नरपतगंज यादवों का सीट है और फारबिसगंज बनिया का सीट है तो इसका पार्टी ऑफिस के बाहर बोर्ड लगा देना चाहिए। वह प्रदेश और केंद्र के भाजपा नेताओं से कहना चाहते हैं कि सबका साथ, सबका विकास की बात वह क्यों करते हैं? अगर जात-पात की राजनीति करनी है तो सबका साथ, और सबका विकास की बात करना बेमानी है। पार्टी ने उनके साथ गद्दारी की है। वह खुद नरपतगंज से चुनाव मैदान में उतरेंगे।"