समस्तीपुर
बिहार के 30 जिलों में डिस्ट्रिक्ट अर्ली इंटरवेंशन सेंटर (DEIC) स्थापित किए जाएंगे। इन केंद्रों के जरिए नवजात से लेकर छह वर्ष तक के बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की जांच, निगरानी और उपचार की सुविधा मिलेगी। खासतौर पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को यहां परामर्श, उपचार के साथ खेल और शैक्षणिक गतिविधियों से भी जोड़ा जाएगा।
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राज्य स्वास्थ्य समिति के निर्देश पर इन सेंटरों के लिए जमीन चिन्हित करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। प्रत्येक सेंटर के लिए लगभग 11,388 वर्गफीट भूमि की आवश्यकता होगी। कार्यपालक निदेशक अमित कुमार पांडेय ने सभी जिलों को पत्र भेजकर सदर अस्पताल परिसर में भूमि उपलब्ध कराने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने को कहा है।
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प्रत्येक जिले में डीईआईसी भवन के निर्माण पर करीब 1.25 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जबकि आवश्यक उपकरण और सामग्री पर अलग से लगभग 25 लाख रुपये की राशि व्यय होगी। इन केंद्रों में पेडियाट्रिशियन, ऑडियोमेट्रिस्ट, फिजियोथेरेपिस्ट और स्पीच थेरेपिस्ट जैसे विशेषज्ञ तैनात रहेंगे।
यहां दिल से जुड़ी जन्मजात बीमारियां, कटे-फटे होंठ, पांव टेढ़ा होना, कुपोषण, एनीमिया, डायरिया, गंभीर संक्रमण, लिवर, किडनी और आंत से संबंधित रोगों के इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में नियमित जांच शिविर लगाकर बच्चों की पहचान पहले से ही की जा रही है। समस्तीपुर, मधुबनी, सीतामढ़ी, पूर्वी और पश्चिम चंपारण समेत कुल 30 जिलों में भूमि चयन की प्रक्रिया जारी है।
प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. गिरीश कुमार के अनुसार, राज्य स्तर से पत्र जारी हो चुका है और केंद्रों की स्थापना को लेकर जिला स्तर पर आवश्यक कार्रवाई तेजी से की जा रही है।
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