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2025 में सीएम पद के दावेदार होंगे कुशवाहा! आवास के बाहर पोस्टर लगाकर CM फेस के रूप में किया प्रोजेक्ट

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द फॉलोअप डेस्क
जदयू के संसदीय बोड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा (Upendra Kushwaha) ने सीएम नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) से अपनी राह अलग कर ली है। कुशवाहा ने अपनी नई पार्टी का भी बनी ली है। पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक जनता दल (Rashtriya Lok Janata Dal) है। वह इस पार्टी के अध्यक्ष हैं। नई पार्टी का नया पोस्टर भी लग गया है। उनकी सरकारी आवास 4 एम स्टेंड रोड में बुधवार को इस पोस्टर को लगाया गया है। इस पोस्टर पर लिखा हैं कि- 'उपेंद्र कुशवाहा को लाएंगे नया बिहार बनाएंगे'।


बिहार में विरासत बचाओ नमन यात्रा निकालेंगे कुशवाहा
भारतीय लोक जनता दल के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा बिहार में विरासत बचाओ नमन यात्रा निकालेंगे। इसकी शुरुआत कुशवाहा 28 फरवरी से चंपारण के भितिहरवा से करने जा रहे हैं। ये यात्रा दो चरणों में होगी। पहला चरण 28 फरवरी से 6 मार्च तक होगा। इसमें मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया से छपरा और सीवान जाएंगे। होली के बाद दूसरे चरण की शुरुआत 15 मार्च से होगी। यात्रा का समापन 20 मार्च को पटना, नालंदा, शेखपुरा, भागलपुर, जमुई, औरंगाबाद होते हुए अरवल में जगदेव बाबू के गांव में होगा। इस दौरान अलग-अलग जगहों पर सभा का आयोजन किया जाएगा। बुधवार को पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उपेंद्र कुशवाहा ने ये जानकारी दी।


पहले भी दो बार छेड़ चुके हैं नीतीश का दामन
उपेंद्र कुशवाहा 2 बार पहले भी नीतीश कुमार का साथ छोड़ चुके हैं। साल 2005 में जब बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू की अगुआई वाली एनडीए बिहार की सत्ता में आई तब कुशवाहा अपनी ही सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद कुशवाहा और नीतीश के बीच दूरियां बढ़ गईं। उन्होंने जेडीयू को छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाई। पार्टी का नाम रखा- राष्ट्रीय समता पार्टी।हालांकि साल 2010 में नीतीश के न्योता पर कुशवाहा ने घर वापसी की। उपेंद्र एक बार फिर जेडीयू में आ गए, लेकिन ज्यादा दिन तक साथ नहीं रहे।साल 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2013 में उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) बना ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को अपना समर्थन भी दे दिया। बिहार की तीन लोकसभा सीट पर उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और तीनों सीटें जीत लीं। इसके इनाम में उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह मिली और वो मानव संसाधन राज्य मंत्री बने। साल 2018 आते आते कुशवाहा की पार्टी ढह गई। फिर वे 2019 लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के साथ गए, लेकिन एक भी सीट नहीं मिली। फिर उन्होंने अपनी पार्टी का जदयू में विलय कर दिया।

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