द फॉलोअप डेस्क:
बिहार की राजधानी में आज कुछ ऐसा हुआ जो कोई कभी सोच भी नहीं सकता। अगर मैं आपको कहूं की पटना थोड़े समय के रूक गया था...तो आपको मेरी बात मजाक लगेगी। लेकिन ऐसा हुआ है। 5 मिनट के लिए राजधानी में सारे काम थम गए। पूरी राजधानी मौन हो गई। नेता, राजनेता, अधिकारी हर कोई जहां था, जिस अवस्था में था, वैसे ही रह गया। ऐसा लग रहा था मानों कोई है ही नहीं। हाईकोर्ट की कार्रवाई रोकी गई। वाहनों के पहिये थम गए। कॉलेजों-स्कूल में पढ़ाई रूक गई...और ये सब बस एक सायरन बजने के कारण हुआ। अब आप सोच रहे होंगे की आखिर क्यों? ऐसे कई सवाल आपके मन में आ रहे होंगे। तो बता दें कि ये कोई चिंता की बात नहीं नहीं बल्कि गर्व की बात है। आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि है। इसे शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी कारण से आज राजधानी पटना में भारत की स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहूति देने वाले सूरमाओं की पुण्य स्मृति में मौन धारण किया गया।

बलिदानियों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए किया मौन धारण
पूरे पटना शहर में 10.58 बजे सुबह को सायरन बजाया गया। यह साइरन करीब दो मिनट तक बजता रहा। फिर 11 बजे से आजादी की लड़ाई के हुतात्माओं की पुण्य स्मृति में दो मिनट का मौन धारण किया गया। इस अवधि में सारे कार्यकलाप स्थिर हो गए। फिर 11.03 बजे सायरन बजाकर मौन भंग किया गया। बापू की पुण्यतिथि पर मुख्य कार्यक्रम एनआइटी के पास गांधी घाट में हुआ। वहां ऊपर में सायरन लगा था। इसके अलावा पटना विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी, सचिवालय, रिजर्व बैंक में भी सायरन बजाया गया। आम लोग ने भी सायरन की आवाज सुनते ही स्वतंत्रता के लिए प्राणों की आहुति देने वाले बलिदानियों के प्रति श्रद्धा प्रकट करने के लिए मौन धारण किया। पटना में पूर्व में कई अन्य स्थानों पर भी सायरन की आवाज गूंजती थी।
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बापू का पटना का खास लगाव
बुजुर्गों का कहना है कि सन 1962 में चीन से युद्ध के समय सायरन की आवाज सुनाई देती थी। कहीं- कहीं आर्मी गन से भी मौन शुरू और खत्म करने का संकेत दिया जाता है। बापू का पटना का खास लगाव था। पटना उनके दिल में बसता था। वे आंदोलनों की धार देने बार-बार यहां आते रहे। चंपारण के किसानों की मदद का वादा करने बापू पहली बार 10 अप्रैल 1917 को पटना पहुंचे थे। विद्यापीठ की स्थापना छह फरवरी 1921 को की थी। विद्यापीठ के अध्यक्ष डा. विजय प्रकाश के अनुसार बापू अपने सहयोगियों के साथ पांच मार्च 1947 को पटना पहुंचे थे। गांधी मैदान स्थित डा. सैयद महमूद के आवास पर 40 दिन रुके थे। आज इस आवास को एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट के नाम से जाना जाता है। यहीं रहकर बापू के निर्देश पर गांवों में शांति स्थापना हेतु प्रयास चल रहा था।
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