द फॉलोअप डेस्क
आयकर विभाग को बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान टिकट वितरण से लेकर चुनाव लड़ने तक में करोड़ों रुपये के लेनदेन की महत्वपूर्ण सूचना मिली है। इसके आधार पर, विभाग अब इन उम्मीदवारों की चल-अचल संपत्ति, आय और चुनावी खर्च का विस्तार से आकलन करेगा।.jpg)
दरअसल, पांच साल में कई नेताओं की संपत्ति दस गुना तक बढ़ गई है। ऐसे में आयकर विभाग इस विधानसभा चुनाव में उतरे प्रत्याशियों की संपत्तियों की जांच करेगा। फ़िलहाल जांच का दायरा चुनाव जीतने वाले और उनके मुख्य प्रतिद्वंद्वी तक ही रहेगा। हालांकि जरूरत पड़ने पर बाकी प्रत्याशियों की भी जांच की जा सकती है।.jpeg)
शुक्रवार को परिणाम आने के बाद विजेता और रनर (मुख्य प्रतिद्वंद्वी) की सूची तैयार की जाएगी। निर्वाचन आयोग ने 2020 व 2025 के चुनावी हलफनामे आयकर विभाग को सौंप दिए हैं। इनके आधार पर संपत्ति में अप्रत्याशित वृद्धि, आयकर रिटर्न और चुनावी खर्च की जांच की जाएगी।
आयकर विभाग के अधिवक्ता प्रदीप कुमार वर्मा ने जानकारी दी कि, प्रत्याशियों को अपनी संपत्ति, कर्ज और निवेश का पूरा ब्योरा शपथपत्र में देना होता है। अगर इनके आधार पर कोई गड़बड़ी पायी जाती है तो आयकर विभाग इस पर कार्रवाई करता है।
बता दें कि इसके पहले 2020 में भी चुनाव के बाद जांच हुई थी। इस दौरान कई प्रत्याशियों को भी स्पष्टीकरण देना पड़ा। मुजफ्फरपुर के एक पार्षद के ठिकानों पर 4 दिनों तक छापेमारी हुई थी।