logo

उपेंद्र कुशवाहा की नीतीश कुमार से राह फिर हुई अलग, तीसरी बार बनाई नई पार्टी

upendre1.jpg

द फॉलोअप डेस्क
जनता दल यूनाइटेड (JDU) में पिछले काफी दिनों से आर-पार की लड़ाई चल रही थी। आखिरकार 18 साल के सियासी सफर में तीसरी बार संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी राह नीतीश कुमार अलग कर ली है। इसके साथ ही कुशवाहा ने अपनी नई पार्टी के नाम की भी घोषणा कर दी है। पार्टी का नाम राष्ट्रीय लोक जनता दल है। वह इस पार्टी के अध्यक्ष हैं। इस दौरान कुशवाहा ने कहा कि नीतीश कुमार के साथ मेरी सफर की शुरूआत अच्छी थी लेकिन अंत बुरा रहा। अब मैं एक नए सफर की शुरूआत करने जा रहा हूं। बता दें कि यह तीसरी बार है जब कुशवाहा ने अपनी पार्टी बनाई है।

ये भी पढ़ें:- क्राइम कंट्रोल पर DGP कर रहे थे बैठक, दूसरी ओर चली 50 राउंड गोली, 2 लोगों की हुई मौत


नीतीश कुमार ने पार्टी को गिरवी रख दिया
उपेंद्र कुशवाहा ने प्रेस वार्ता में कहा कि पार्टी की शुरूआत नीतीश कुमार के नेतृत्व में अच्छी रही। लेकिन अब कार्यकर्ता काफी परेशान है। नीतीश कुमार जिस राह पर चल रहे है वह पार्टी के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि नीतीश कुमार को पास अब कुछ नहीं है। उन्होंने पार्टी को गिरवी रख दिया है। मैं नीतीश कुमार से क्या मांगूगा। उनके पास खुद कुछ नहीं है। पहले नीतीश कुमार पार्टी को लेकर फैसला करते थे कि तो कार्यकर्ता से पूछ कर करते थे। लेकिन अब तो वह पार्टी को लेकर खुद फैसला ही नहीं लेते। मैंने जब पार्टी पर सवाल उठाया तो मुझे कहा गया कि पार्टी छोड़कर चले जाइये।


पहले भी दो बार छेड़ चुके हैं नीतीश का दामन
उपेंद्र कुशवाहा 2 बार पहले भी नीतीश कुमार का साथ छोड़ चुके हैं। साल 2005 में जब बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी और जेडीयू की अगुआई वाली एनडीए बिहार की सत्ता में आई तब कुशवाहा अपनी ही सीट से चुनाव हार गए। इसके बाद कुशवाहा और नीतीश के बीच दूरियां बढ़ गईं। उन्होंने जेडीयू को छोड़कर अपनी नई पार्टी बनाई। पार्टी का नाम रखा- राष्ट्रीय समता पार्टी।हालांकि साल 2010 में नीतीश के न्योता पर कुशवाहा ने घर वापसी की। उपेंद्र एक बार फिर जेडीयू में आ गए, लेकिन ज्यादा दिन तक साथ नहीं रहे।साल 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मार्च 2013 में उपेंद्र कुशवाहा ने अपनी नई पार्टी राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) बना ली। 2014 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को अपना समर्थन भी दे दिया। बिहार की तीन लोकसभा सीट पर उनकी पार्टी ने चुनाव लड़ा और तीनों सीटें जीत लीं। इसके इनाम में उन्हें मोदी कैबिनेट में जगह मिली और वो मानव संसाधन राज्य मंत्री बने। साल 2018 आते आते कुशवाहा की पार्टी ढह गई। फिर वे 2019 लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव के साथ गए, लेकिन एक भी सीट नहीं मिली। फिर उन्होंने अपनी पार्टी का जदयू में विलय कर दिया।

हमारे वाट्सअप ग्रुप से जुड़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: https://chat.whatsapp.com/EUEWO6nPYbgCd9cmfjHjxT