logo

Followup Special News

साबरमती का संत-50: आज़ादी में महज़ महात्मा गांधी के योगदान की ही चर्चा क्यों

'आज अंतिम किस्त: ‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’ - आइंस्टीन

इतिहास: मुग़ल बादशाह अकबर के बारे में शिवाजी महाराज ने यह क्या लिख दिया था

'पत्र में शिवाजी के माध्यम से अकबर के प्रति उनकी प्रजा की भावनाएं भी उजागर होती है।

'द क्रुड्स' परिवार की तरह बदल रही दुनिया के साथ बढ़े क़दम तो जानें

क्योंकि अप्रासंगिक हो जाने' से बढ़कर कोई दुःख नहीं-बता रहे हैं मनोवैैैैैैज्ञानिक डॉ. अबरार मुल्तानी

वीर! -5 : सावरकर के दर्शन में प्रतिशोध और प्रतिहिंसा के तत्व कितने - दो

'सावरकर की हिंसा और प्रतिशोध की विचारधारा को समझने के लिए उनकी पुस्तक भारतीय इतिहास के छह स्वर्णिम पृष्ठ का अध्ययन आवश्यक

साबरमती का संत-49: महात्मा गांधी के धर्म और राजनीति का मतलब

दिक्कत धर्म में नहीं, धर्मों में बढ़ते कट्टरपंथ की वजह से है। उसके राजनीतिक इस्तेमाल की वजह से है।

सोचो ज़रा: रीति-रिवाज को भी सांप्रदायिक नज़रिये से देखना!

भाषाएँ धर्म की पहचान नहीं करातीं। भाषाओं का संबंध संस्कृति से होता है।

वीर! -4 : सावरकर के दर्शन में प्रतिशोध और प्रतिहिंसा के तत्व कितने - एक

''सावरकर के आधुनिक पाठ में उन्हें वैज्ञानिक, आधुनिक और तार्किक हिंदुत्व के प्रणेता तथा हिन्दू राष्ट्रवाद के जनक के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है।

साबरमती का संत-48: गांधी की अहिंसा पर बार-बार लौटते कुछ बुनियादी बातों को समझना होगा

'गांधी पाठशाला में गांधी से मुठभेड़-किसान आन्दोलन और गांधी

संयुक्त राष्ट्र संघ, भारत और जवाहरलाल नेहरु -इनके संबंधों की पड़ताल

जी हाँ वध स्थल था पहले, जहाँ संयुक्त राष्ट्र सचिवालय बनाया गया। अब यहाँ मानवता, समानता, विश्व कल्याण की बातें होती हैं।

प्रयाग: इलावास से इलाहाबास होते हुए इलाहाबाद बने शहर में अकबर का योग

इलाहाबाद शहर के वास्तविक संस्थापक थे सम्राट अकबर!

साबरमती का संत-47: किसानों को गांधी के अहिंसक रास्ते पर चलना चाहिए

'‘आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था’ - आइंस्टीन

Load More