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किसान और हिंदुस्तान एक दूसरे से अलग नहीं हो सकते: महात्‍मा गांधी

'गांधी जी ने स्वयं किसान आंदोलनों का सफल नेतृत्व किया। उनकी प्रेरणा से अनेक किसान आंदोलन प्रारंभ हुए और उनके मार्गदर्शन में कामयाब भी हुए। अहिंसा और सत्याग्रह इन किसान आंदोलनों के मूलाधार थे। अप्रैल 1917 का चंपारण सत्याग्रह विशेष रूप से उल्लेखनीय है क्यो

एक साल बाद भी पत्थलगड़ी समर्थकों के ऊपर से राजद्रोह का मुकदमा वापस क्यों नहीं ले पाई है हेमंत सरकार

''जिस दिन हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी, उसी रात कैबिनेट की पहली बैठक में निर्णय लिया गया कि पत्थलगड़ी समर्थकों के ऊपर से राजद्रोह का मुकदमा वापस लिया जाएगा। लेकिन सरकार के 13 महीने बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार उन मुकदमों को वापस नहीं ले स

साहब! सरकार तक हमारा दर्द जरूर पहुंचा देना कि मरहम मिल जाए !!

''''मूलभूत नागरिक सुविधाओं से वंचित असुर के गांव गढ़ाटोली और कोरवा गांव उमाटोली पहली बार पहुंचा मीडिया

किसान आंदोलन के बेपटरी होने की आशंका बेजा नहीं

''लाल किले के अंदर हुई हिंसा के दृश्य देखा। वे कौन थे, पता नहीं। लगा, वे नेतृत्व विहीन और बेकाबू थे. जो भी हो, इसका बचाव नहीं किया जा सकता।

विदेशी पूंजी निवेश से भाषाई भगवाकरण का खतरा मीडिया में बढ़ा, कमलेश्वर ने 2003 में कहा था

''''बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी कमलेश्वर की 27 जनवरी को 14वीं पुण्यतिथि है। 6 जनवरी, 1932 को उत्तरप्रदेश के मैनपुरी में जन्मे कमलेश्वर प्रसाद सक्सेना उर्फ कमलेश्वर की आला तालीम इलाहाबाद में हुई।

महज 19 वर्ष की उम्र में दे दी गई फांसी

'अनंत लक्ष्मण कन्हेरे 11 अप्रैल,1910 को केवल 19 वर्ष की उम्र में फ़ांसी पर लटका दिये गए। इतनी छोटी-सी आयु में ही शहीद होकर भारत माँ के इस लाल ने भारतीय इतिहास में अपना नाम अमर कर लिया।

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