सूरज ठाकुर:
जमुई में नाबालिग कपल के साथ बदसलूकी और मासूम लड़की का यौन उत्पीड़न करने वाले दरिंदों का चेहरा तो देखिए ही, जरा मुखड़ा उनका भी देखिए तो तथाकथित माननीय हैं। हमें समाज के सभी गुनहगारों को उनके रंग, कपड़े, जात या पद से इतर जाकर पहचानना है। एक ओर नाबालिग कपल के साथ घटिया, अमानवीय और शर्मसार हरकत करने वाले राक्षस हैं तो दूसरी और उस वीभत्स कांड को छिटपुट घटना बताने वाले तथाकथित सफेदपोश। ये सबलोग बराबर हैं। यकीन नहीं होता कि ऊंचे पद पर बैठी एक महिला को भी दरिंदो का कृत्य परेशान नहीं करता। उन्हें बस इतनी शिकायत है कि मॉरल पुलिसिंग का यह सही तरीका नहीं था। अब मॉरल पुलिसिंग, माने उत्पीड़न का सही तरीका क्या होता है, यह तो माननीय मंत्री साहिबा ही बताएंगी।
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माननीय मंत्री श्रवण कुमार जी। जमुई की दर्दनाक घटना पर क्या छिटपुट लगा आपको। एक मासूम नाबालिग बच्ची को अंधेरी रात में इंसान के वेश में भेड़िये घेर लेते हैं, कोई उसके स्तनों पर हाथ मारता है तो कोई पीछे। कोई बाल पकड़कर खींचता है तो कोई रेप की धमकी देता है। कोई उसकी जांघों के बीच हाथ डालता है तो कोई गाल पकड़कर दबाता है। कोई धकियाता है तो कोई अपनी ओर खींचता है। समाज के ठेकेदार उन नाबालिग बच्चों की जबरन शादी करा देना चाहते हैं।
तो बताइये न श्रवण कुमार जी। इसमें क्या छिटपुट लगा आपको। आपके हिसाब से बड़ी घटना क्या होती है। अभी आपकी सरकार है तो पूछ ही लेता हूं। क्या उस कपल का बेजान हो चुका शरीर भी बड़ी घटना लगता आपको। कौन सी घटना अपराध है और कौन छिटपुट मामला, क्या ये इस बात से तय होगा कि आपकी सरकार है कि नहीं।
जिम्मेदारी शब्द सुना है आपने। जवाबदेही का मतलब जानते हैं आप। शर्म बाकी भी है कि सुबह नहा-धोकर बालों में कड़ुवा तेल माख लिया और कंघी से बालों को काढ़कर कुर्ता-पायजामा चढ़ा लिया और हूटर वाली गाड़ी में बैठकर बन गये मंत्री। मासूम चीखों को तो कम से कम सियासत के चश्मे से मत देखिए।

उमेश कुशवाहा जी, जमुई में हुए इस गुनाह में क्या मामूली लगा आपको। कैसे तय किया आपने कि यह छोटी-मोटी घटना है। एक मासूम अबोध बच्ची डरी हुई आंखों से हाथ जोड़कर कातर स्वर में भैया-भैया कहती छोड़ देने की गुहार लगाती है। जो गलती है भी नहीं, उसे नही दोहराने का वादा करती है। साथ गये लड़के के साथ अपने मासूम दोस्ती की दुहाई देती है और दरिदों का झुंड कहकहे लगाता है। अश्लील टिप्पणियां करता है। बच्ची को गाली बकता है। बताने का कष्ट कीजिए कि इसमें छोटी-मोटी बात कौन सी थी। उत्पीड़न बड़ा अपराध है, क्या यह बेटियों की लाशें तय करेगी।
राजनीति में नैतिक पतन होता है, लेकिन यदि आपकी नैतिकता रसातल में ना जा गिरी हो और जेहन में इतना भी जमीर जिंदा हो तो उस पीड़िता के घर जाइये और उसकी आंखों में देखकर बोलिए कि यह छोटी-मोटी घटना थी।
उमेश कुशवाहा बिहार में सत्तारुढ़ जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष हैं। एकबार नीतीश कुमार के आवास हो आइये। जिन्होंने अपनी पूरी जिंदगी बिहार में महिला सशक्तिकरण के लिए काम करते हुए खपा दी, आपके हाथों उसकी मटिया पलीद होते देख कैसा महसूस कर रहे होंगे, एकबार देख आइएगा। हैरानी होती है कि आप जैसे लोग नीति-निर्माता हैं।
जेडीयू प्रवक्ता राजीव रंजन जी। जब अच्छा नहीं बोल सकते तो चुप रहना चाहिए। बचपन की सीख याद नहीं है जो आप मंत्री श्रवण कुमार और जेडीयू प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा का फैलाया रायता समेटने आ गये। यकीन नहीं होता कि जमुई में हुए अपराध पर चौतरफा आक्रोश के बीच आप उमेश कुशवाहा और श्रवण कुमार के बयानों का भावार्थ समझाने आ गए।
माना कि नैतिक पतन होना नेता होने का सर्वोत्तम गुण है, लेकिन इतनी अपेक्षा है कि मासूमों के मामले में थोड़ी संवेदनशीलता बरतेंगे।
माननीय मंत्री महोदया श्रेयसी सिंह। आपसे तो बेटर उम्मीद किए थे। खिलाड़ी रही हैं। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर गौरव रही हैं भारत का। आप जमुई के अपराध को मोरल पुलिसिंग बता रही हैं। नेशनल टीवी पर आंखों में शर्म और माथे पर शिकन लाए बिना कह रही हैं कि मोरल पुलिसिंग का तरीका थोड़ा और बेहतर हो सकता था। यह कहा जाना जितना हैरान करता है, उससे कहीं ज्यादा हैरानी इस बात से होती है कि ये बात एक पढ़ी-लिखी, अंतर्राष्ट्रीय स्पोर्ट्स पर्सन रह चुकी कैबिनेट की मंत्री कह रही है। श्रेयसी जी। क्या होती है मोरल पुलिसिंग।
वीडियो में गंदे-भद्दे तरीके से कहकहे लगा रहे ये अश्लील, कुंठित और घटिया लोग बताएंगे कि सही और गलत क्या है। ये जो खुद समाज में इंसानियत के चेहरे पर बदनुमा धब्बा हैं। वो जो वांछित हैं, वो बताएंगे कि लड़की को क्या पहनना चाहिए। कब, कहां और किसके साथ घूमने जाना चाहिए। और आप टीवी पर बैठकर उनका बचाव करेंगी। छी! शर्मनाक..शर्मनाक. शर्मनाक.....इससे ज्यादा और क्या कहूंगा।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी जी। सरकार में आपकी सहयोगी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और 2 कैबिनेट मंत्री जब इतने बड़े अपराध को छोटी-मोटी और छिटपुट घटना बताएंगे तो कैसे विश्वास होगा कि आप और आपकी सरकार महिला सुरक्षा को लेकर गंभीर है। आपसे जवाबदेही की उम्मीद कैसे करेंगे। कुछ जिम्मेदारी है कि नहीं।
यही है महिला अपराध के प्रति आपकी जीरो टॉलरेंस की नीति, जहां आपकी सरकार के मंत्री और सहयोगी दल के प्रदेश अध्यक्ष एक अपराध को कमतर बताने की कोशिश करती हैं। यदि कोई बीमारी गंभीर मानी नहीं जायेगी तो इलाज कैसे होगा। फिर तो बीमारी नासूर बन जायेगी। देखिए। संभालिए जरा शर्म बेच चुके आपके साथियों को।