रांची:
पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने कहा कि देश पीएम मोदी को एक नेता के रूप में याद रखेगा जिन्होंने प्रधानमंत्री की कुर्सी का इस्तेमाल जनता के बीच भ्रम और झूठ फैलाने के लिए किया। अंबा प्रसाद ने कहा कि जब 5 राज्यों में विधानसभा के चुनाव हो रहे थे, तब ऐसी क्या आपात स्थिति आ गई कि विशेष सत्र बुलाकर प्रपंच रचा गया। उन्होंने कहा कि कोई राष्ट्रीय संकट तो नहीं था और ना ही कोई राजनीतिक संकट जैसी स्थिति आई थी। महिला आरक्षण बिल तो 2023 में ही पारित हो चुका है। संविधान में भी अनुच्छेद 330ए, 332ए और 334ए जोड़ा गया है। महिला आरक्षण बिल दोबारा क्यों पेश किया गया।
अंबा प्रसाद ने कहा कि एक ही बिल को कितनी बार पेश किया जा सकता है। किसी बिल पर वोटिंग होती है और बहुमत नहीं मिलने पर बिल निरस्त हो जाता है। लेकिन, अतीत में कौन से प्रधानमंत्री ने मीडिया के माध्यम से जनता को भ्रमित करने वाला भाषण दिया है।
बीजेपी पर जनता को दिग्भ्रमित करने का आरोप लगाया
अंबा प्रसाद ने बीजेपी पर देश के नागरिकों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि देश की अधिकांश आबादी गांवोंमें रहती है। लोग मुख्य रूप से किसान हैं। अंबा प्रसाद ने कहा कि देश में बमुश्किल 30 फीसदी लोग ही शिक्षित हैं और उनमें भी 1 फीसदी लोग ही कानून की समझ रखते हैं। पूर्व विधायक ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने इसी बात का फायदा उठाकर लोगों को दिग्भ्रमित किया। बीजेपी के सांसद, विधायक और मंत्री रैली-जुलूस निकालकर मीडिया के माध्यम से लोगों को कांग्रेस के खिलाफ भड़काते हैं। अंबा प्रसाद ने कहा कि बीजेपी के इसी झूठ के खिलाफ कांग्रेस ने मुहिम छेड़ी है ताकि उनका प्रपंच उजागर किया जा सके। उन्होंने कहा कि भविष्य में और भी कार्यक्रम होंगे, जिसके जरिए देश की महिलाओं को बताया जाएगा कि उनका असली उत्पीड़क कौन है।

संविधान जागृति अभियान के तहत कांग्रेस का भाजपा पर तीखा पलटवार
संवैधानिक साक्ष्यों को पेश करते हुए अंबा प्रसाद ने जनता से अपील की कि वे स्वयं अपने मोबाइल पर संविधान की डिजिटल प्रति खोलकर सच देखें। अंबा प्रसाद ने जोर देकर कहा, "कांग्रेस तो प्रमाण के साथ बात कर रही है, लेकिन भाजपा बिना किसी प्रमाण के केवल 'भोंपू' (लाउडस्पीकर) के जरिए दुष्प्रचार कर रही है।" अंत में, उन्होंने मीडिया (लोकतंत्र के चौथे स्तंभ) से आग्रह किया कि वे संविधान की गरिमा बचाएं रखने मे मीडिया का अहम भूमिका है और संविधान का दुष्प्रचार करने वालों को संविधान का चौथा स्तंभ बिल्कुल भी समर्थन न दें। अब कांग्रेस 'संविधान जागृति अभियान' के माध्यम से भाजपा के इस 'भ्रम जाल' को तोड़ने के लिए मैदान में उतर चुकी है।
महिला आरक्षण बिल पर राजनीतिक बयानबाज़ी
उन्होंने महिलाओं से जुड़े प्रसाधनों का एक बेहद रोचक उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि भाजपा महिलाओं को लिपस्टिक देने का वादा कर रही थी, लेकिन डिब्बे के अंदर नेलपॉलिश डालकर रखी थी। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस ने तुरंत उस लिपस्टिक के डब्बे से नेलपॉलिश निकालकर के भाजपा के ही होठों पर लगा कर छोड़ दिया था और सोचे थे कि चुप हो जाएँगे पर भाजपा तो बहुत ही ज्यादा झूठ बोलने लगी इसलिए अब हमलोग उस नेलपॉलिश पर थोड़ी सच्चाई की हवा फूंक देते है, उम्मीद है की अब होठ चिपक जायेंगे और अब भाजपा वाले चुप हो जायेंगे , नहीं तो आगे कार्यक्रम की कमी नहीं है । उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा द्वारा लाया गया 'नया बिल' वास्तव में महिला आरक्षण से संबंधित था ही नहीं, बल्कि असंवैधानिक परिसीमन (Delimitation) की आड़ में उलझाकर एक नया भ्रम पैदा करने का प्रयास था। चूंकि वह बिल केवल एक गंभीर संवैधानिक त्रुटि और चुनावी छलावा था, इसीलिए वह गिर गया।