द फॉलोअप डेस्क
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी को एक पत्र लिखा है। इस पत्र के जरिये उन्होंने हाल ही में भाजपा विधायक सीपी सिंह द्वारा बाबूलाल मरांडी के खिलाफ की गई टिप्पणी पर गहरी आपत्ति जताई है और इसे पूरे आदिवासी समाज का अपमान करार दिया है। मंत्री डॉ इरफान अंसारी ने अपने पत्र में लिखा है कि "आप भले ही भारतीय जनता पार्टी के लिए लाख प्रयास कर लें, पूरी निष्ठा और निस्वार्थ भाव से कार्य करते रहें, लेकिन आज की सच्चाई यही है कि भाजपा कभी आपको अपना नहीं मानेगी। हाल ही में खुले मंच से भाजपा विधायक सीपी सिंह द्वारा जिस प्रकार आपकी ईमानदारी, आपकी विश्वसनीयता, आपकी लगन और आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाई गई, उसने भाजपा में आदिवासी समाज के सम्मान पर गहरे और गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आपको “आया राम–गया राम” जैसे शब्दों से संबोधित करना केवल आपकी व्यक्तिगत गरिमा का अपमान नहीं है, बल्कि यह पूरी आदिवासी अस्मिता, स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर सीधा और अस्वीकार्य हमला है। आज आपको स्वयं यह सोचने पर विवश होना पड़ रहा होगा कि भाजपा में एक आदिवासी नेता का वास्तविक सम्मान आखिर क्या है।".jpeg)
उन्होंने आगे लिखा "सीपी सिंह के इस बयान से मैं गहराई से आहत हूँ। एक आदिवासी समाज से आने वाला जनप्रतिनिधि होने के नाते यह पीड़ा सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और आत्मिक है। मैं सीपी सिंह से स्पष्ट शब्दों में कहना चाहता हूँ कि आदरणीय बाबूलाल मरांडी जी भले ही आज भाजपा में हों, लेकिन झारखंड हमारा है। यह हमारी मिट्टी है, हमारी संस्कृति है, हमारा इतिहास है और हमारा स्वाभिमान है। आदिवासी मूल्यों और अस्मिता से हमें गर्व है, और यह गर्व किसी भी पार्टी की सदस्यता से बड़ा है।" डॉ अंसारी ने लिखा "खुले मंच से जिस अहंकारी और असंवेदनशील लहजे में आपको ऊँची नसीहत दी गई, जिस तरह “आया राम–गया राम” कहकर आपके संघर्ष, तपस्या और योगदान को अपमानित किया गया—उसे मैं न सिर्फ दुर्भाग्यपूर्ण, बल्कि शर्मनाक मानता हूँ। इससे मुझे व्यक्तिगत रूप से गहरी पीड़ा पहुँची है और मन अत्यंत व्यथित हुआ है। राजनीति में मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मर्यादा, संवेदनशीलता और सम्मान अनिवार्य होने चाहिए।".jpg)
उन्होंने पत्र के जरिये सीपी सिंह से तीखे सवाल करते हुए कहा "मैं सीपी सिंह से सीधा सवाल पूछना चाहता हूँ- भाजपा में जिन-जिन तथाकथित “बोरो प्लेयर्स” को दूसरी पार्टियों से तोड़कर लाया गया, क्या वे सभी स्वेच्छा से आए थे या भाजपा ने उन्हें शामिल किया था? अगर भाजपा ने उन्हें शामिल किया, तो क्या उनकी कोई इज्जत, कोई गरिमा, कोई सम्मान नहीं है? या फिर भाजपा में आने वाला हर नेता आपकी नजर में “आया राम–गया राम” ही होता है?"
आगे उन्होंने सीपी सिंह से सार्वजनिक माफी की मांग करते हुए लिखा "यह बयान सिर्फ बाबूलाल मरांडी जी का अपमान नहीं है, बल्कि पूरे आदिवासी समाज और उसकी अस्मिता को ठेस पहुँचाने वाला बयान है। सीपी सिंह की यह भाषा उनकी संकीर्ण सोच, राजनीतिक अहंकार और आदिवासी विरोधी मानसिकता को उजागर करती है। मैं स्पष्ट और दृढ़ शब्दों में मांग करता हूँ कि सीपी सिंह को सार्वजनिक मंच से आदरणीय बाबूलाल मरांडी जी और पूरे आदिवासी समाज से बिना शर्त माफी माँगनी चाहिए। यदि भाजपा में आदिवासियों के लिए वास्तव में सम्मान है, तो उसे भाषणों में नहीं, अपने आचरण और कर्मों में साबित करना होगा।".jpeg)
अंत में उन्होंने कहा "भले ही बाबूलाल मरांडी जी आज भाजपा में हों, लेकिन वे पहले भी आदिवासी थे, आज भी हैं और आगे भी रहेंगे। एक आदिवासी होने के नाते मैं उनका सम्मान करता हूँ और आदिवासी अस्मिता पर किसी भी प्रकार के अपमान को स्वीकार नहीं कर सकता। सीपी सिंह का यह बयान उनकी नकारात्मक सोच और आदिवासी विरोधी मानसिकता का स्पष्ट प्रतिबिंब है, जिसे इतिहास और समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।"