जामताड़ा
जामताड़ा में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा को क्षतिग्रस्त किए जाने और तीर-धनुष तोड़े जाने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है. इस मामले को एलकार अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं होने से आदिवासी समाज में भारी उबाल है. बता दें 6 मई की देर रात कोर्ट मोड़ स्थित भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा के साथ आसामजिक तव्तों ने छेड़छाड़ की थी. इसे लेकर माझी परगना स्वशासन व्यवस्था का शिष्टमंडल जामताड़ा थाना पहुंचा और पुलिस की कार्यशैली पर कड़ा विरोध जताया. शिष्टमंडल के सदस्यों ने थाना प्रभारी को औपचारिक आवेदन सौंपकर 48 घंटे के भीतर दोषियों को सलाखों के पीछे भेजने की मांग की है. समाज के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय सीमा में गिरफ्तारी नहीं होती है, तो आदिवासी समाज उग्र आंदोलन करने और चक्का जाम करने को विवश होगा.
महापुरुष का अपमान बर्दाश्त नहीं: माझी परगना स्वशासन व्यवस्था
इस अवसर पर सुनील कुमार हेमराम, महादेव सोरेन, वीरेंद्र मुर्मू, आलोक सोरेन और विजय कुमार टुडू सहित अन्य वक्ताओं ने अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा न केवल आदिवासी समाज के नायक हैं, बल्कि पूरे देश के स्वतंत्रता सेनानी और प्रेरणा स्रोत हैं. उनकी प्रतिमा को क्षतिग्रस्त करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है. इस घटना ने पूरे जिले के नागरिकों की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई है. शिष्टमंडल ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से मांग की है कि क्षतिग्रस्त प्रतिमा की अविलंब मरम्मत कराई जाए और उसे पूरे सम्मान के साथ पुनः स्थापित किया जाए. भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महापुरुषों की प्रतिमाओं और सार्वजनिक चौकों पर उच्च गुणवत्ता वाले CCTV कैमरे लगाए जाएं. संवेदनशील स्थलों और प्रतिमाओं की सुरक्षा के लिए नियमित पुलिस पेट्रोलिंग और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. प्रतिनिधियों ने जिले के वरीय अधिकारियों को भी इस संबंध में सूचित कर दिया है. अब देखना यह है कि प्रशासन समाज के इस आक्रोश को शांत करने के लिए कितनी जल्दी ठोस कार्रवाई करता है.
