द फॉलोअप डेस्क
1932 स्थानीयता बिल को राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने पूनार्विचार के लिए लौटा दिया है। इस बात की जानकारी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में स्पीकर रबींद्र नाथ महतो ने दी। उन्होंने इस दौरान राज्यपाल का संदेश सुनाते हुए कहा कि बिल से संविधान का उल्लंघन हो सकता है। विद्येयक में धारा-6 (ए) संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 16 (ए) का उल्लंघन कर सकती है। इस कारण यह बिल अमान्य किया जा सकता है। बिल को राज्यपाल के पूनार्विचार के लिए लौटाने के बाद हेमंत सरकार फिर बिल को पेश करेंगे।

केवल स्थानीय व्यक्तियों के लिए सुरक्षित करने पर कर सकते है विचार
संदेश में कहा गया है कि अटॉर्नी जनरल की कानूनी और संवैधानिक राय के अनुसार विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटाया जा रहा है।वर्तमान विधेयक के माध्यम से, राज्य सरकार के तहत वर्ग- III और वर्ग- IV के पदों पर नियुक्तियां केवल स्थानीय व्यक्तियों के लिए आरक्षित होंगी। ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार के तहत तृतीय श्रेणी और चतुर्थ श्रेणी पदों पर आवेदन करने से स्थानीय व्यक्तियों के अलावा अन्य व्यक्तियों को अवसर नहीं देना संविधान के अनुरूप नहीं होगा। अध्यक्ष ने राज्यपाल के संदेश को आगे पढ़ा, कहा गया है कि संवैधानिक रूप से सुरक्षित तरीका चतुर्थ श्रेणी के पदों को केवल स्थानीय व्यक्तियों के लिए सुरक्षित करने पर विचार किया जा सकता है। लेकिन, इसकी समीक्षा पांच साल के बाद की जाएगी।

अब आगे सरकार की रणनीति पर नजर
अब सरकार के पास चलते सत्र में इसे दोबारा पेश करने का समय है। सीए हेमंत सोरेन सरकार आपके द्वार के मंच से 1932 खतियान आधारित विधेयक को फिर से लाने का ऐलान कर चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, सरकार विधानसभा के इसी शीतकालीन सत्र में इस विधेयक को फिर से पेश करने पर विचार कर रही है।