द फॉलोअप डेस्क
ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के माध्यम से विधायक प्रदीप यादव ने समान काम के लिए समान वेतन का मामला उठाया। उन्होनें कहा कि राज्य में एक ही काम के लिए 3 तरह का वेतन दिया जा रहा है। स्थायी कर्मी को लाखों वेतन मिल रहा है वहीं अस्थायी कर्मी को बहुत कम वेतन दिया जा रहा है। उन्होनें कहा कि अध्यक्ष महोदय आलम यहभी है कि 8 हजार की नौकरी के लिए 35 हजार की घुस ली जा रही है वो भी ऑनलाइन, यह दुर्भाग्यपूर्ण है। आउटसोर्सिंग दोहन का जरिया है। उन्होनें कहा कि अस्थायी नियुक्ति को सरकार अवैध मानती है तो इस काम पर लगे लोगों पर सरकार रोक क्यों नहीं लगती। उन्होनें कहा कि हरित फाउंडेशन ने घुस लेकर अस्थायी नियुक्ति कराई और मानदेय भी नहीं दे रही है। उन्होनें कहा कि यह सर्वोच्च न्यायालय के समान काम के बदले समान वेतन के निर्णय का उल्लंघन है। सरकार इसपर अविलंब रोक लगाए।

सरकार को संविधान के अनुरूप निर्णय लेना होता है : रामेश्वर
जवाब में वित्त मंत्री रामेश्वर उरांव ने कहा कि नियुक्ति को लेकर सरकार का अपना नियम है। हमें संविधान के अनुरूप काम करना पड़ता है। संविधान से बाहर जाकर कोई निर्णय नहीं ले सकते। कहा कि नियमित कर्मचारी ओपन बाजार से लिए जाते हैं। परीक्षा ली जाती है। उन्हें कई प्रोसेस से गुजरना पड़ता है। हजारों लोग परीक्षा में बैठते हैं। कुछ सेलेक्ट होते हैं। अधिकांश रिजेक्ट होते हैं। जहां तक संविदा या अस्थायी कर्मी की बात है इसकी नियुक्ति राज्य या क्षेत्रीउ कमिटी करती है। उन्होनें कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मियों को नियमित करने ले लिए विकास आयुक्त की अध्यक्षता में कमिटि अध्ययन कर रही है। कहा कि 10 वर्षों से कॉन्ट्रैक्ट पर काम कर रहे कर्मियों को नियमित करने का निर्णय 2015 में हुआ था। इसके बाद 2019 में भी यह निर्णय हुआ है। इसमें कुछ आपत्ति थी जिसपर विकास आयुक्त की अध्यक्षता वाली कमिटी अध्ययन कर रही है। बहुत जल्द इसका रिपोर्ट आनेवाला है। सरकार रिपोर्ट के आधार पर काम करेगी।
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