द फॉलोअप डेस्क
शिव ही सत्य हैं और उनके भक्तों की कमी भी नहीं। सावन में जहां लाखों कांवरिए जल चढ़ाने बाबा धाम पहुंचते हैं, वहीं हजारीबाग के 65 वर्षीय उपेंद्र कुमार पिछले 40 वर्षों से एक अनोखी परंपरा निभा रहे हैं। उपेंद्र हर पूर्णमासी को सुल्तानगंज से गंगाजल उठाकर 105 किलोमीटर पैदल चल, सिर्फ 24 घंटे में बाबा बैद्यनाथ के दरबार पहुंचते हैं और जलाभिषेक करते हैं। यह यात्रा वे साल में 13 बार पूरी करते हैं। सावन में तो उनकी आस्था दोगुनी हो जाती है दो बार बाबा धाम पहुंचकर जल अर्पित करते हैं।
व्यवसाय से सफल, परिवार में खुशहाल बेटा और बहू इंजीनियर, बेटी डॉक्टर बनने की राह पर उपेंद्र का मानना है कि ये सब भोले की असीम कृपा का परिणाम है। वे बताते हैं, “पहली बार बाबा के दर्शन के बाद से जीवन बदल गया। व्यापार, परिवार, मान-सम्मान, सब कुछ बाबा का दिया है।”
पिछले 30 वर्षों से ऐसा एक भी दिन नहीं गया जब उन्होंने बाबा की पूजा न की हो। जैसे ही पूर्णिमा नज़दीक आती है, मन अपने आप कांवर उठाकर बाबा धाम की ओर चल पड़ते है। उनके लिए कांवड़ यात्रा अब जीवन का हिस्सा है, और यह जोश आज भी किसी युवा कांवरिए से कम नहीं।
