द फॉलोअप डेस्क
गिरिडीह जिले के लिए गौरव की बात सामने आई है। देश के संविधान की जिन चार दुर्लभ प्रतियों को आधिकारिक रूप से संरक्षित माना जाता है, उनमें से एक झारखंड के गिरिडीह में सुरक्षित रखी गई है। यह तथ्य न केवल गिरिडीह बल्कि पूरे झारखंड और के लिए गर्व और ऐतिहासिक महत्व का विषय है। अविनाश कुमार के अनुसार, लगभग 30 वर्ष पहले यह संविधान की दुर्लभ प्रति कोलकाता की एक प्रमुख लाइब्रेरी से गिरिडीह लायी गई थी। इसके बाद इसे जिला केंद्रीय पुस्तकालय, गिरिडीह में सुरक्षित रूप से संरक्षित रखा गया है। पुस्तकालय प्रशासन के मुताबिक, इस अमूल्य दस्तावेज़ को विशेष निगरानी और संरक्षण के तहत रखा गया है, ताकि इसकी ऐतिहासिक और बौद्धिक महत्ता आने वाली पीढ़ियों तक सुरक्षित रहे।
संविधान की इस प्रति का गिरिडीह में होना जिले की सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान को नई ऊंचाई प्रदान करता है। इतिहासकारों का कहना है कि यह प्रति शोधकर्ताओं, विद्यार्थियों और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए अमूल्य धरोहर साबित हो सकती है। इसके संरक्षण से न केवल क्षेत्र की प्रतिष्ठा बढ़ी है बल्कि यह पुस्तकालय और जिले की समृद्ध बौद्धिक विरासत को भी मजबूत करता है। स्थानीय लोगों में भी इस खबर को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है। कई समाजसेवी और बुद्धिजीवी इसे गिरिडीह की ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए इसके संरक्षण को और बेहतर करने की मांग कर रहे हैं। जिला प्रशासन और पुस्तकालय कर्मियों की पहल की भी सराहना की जा रही है, जिन्होंने इस महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को तीन दशकों से सुरक्षित रखा है।
