नंदलाल तुरी
पाकुड़ जिला प्रशासन द्वारा सतत आजीविका संवर्धन के लिए चलाई जा रही विकास योजनाएँ अब जमीनी स्तर पर वास्तविक बदलाव ला रही हैं। महेशपुर प्रखंड की कानीझाड़ा पंचायत के ग्राम सुराई निवासी मजीबुल शेख ने अपनी वर्षों से खाली पड़ी भूमि को हरियाली और आय का मजबूत साधन बना लिया है। आर्थिक तंगी, सीमित संसाधन और अनुपयोगी भूमि के कारण मजीबुल शेख का परिवार स्थायी आय से वंचित था। खेती करने का सपना होने के बावजूद संसाधनों की कमी के चलते उन्हें मजदूरी और पलायन पर निर्भर रहना पड़ता था।
जिला प्रशासन ने मजीबुल शेख को बिरसा हरित ग्राम योजना से जोड़ते हुए खेती की नई राह दिखाई। योजना के अंतर्गत मिश्रित खेती के माध्यम से प्याज़, आलू, गोभी, बैंगन, टमाटर जैसी नगदी फसलें उगाई गईं, सिंचाई व्यवस्था सुदृढ़ की गई और सूनी पड़ी भूमि को उपजाऊ कृषि क्षेत्र में बदल दिया गया। खेती शुरू होते ही मजीबुल शेख की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई और स्थानीय ग्रामीण मजदूरों को भी रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इससे गांव में आर्थिक गतिविधियों को नया बल मिला और परिवार पूरी तरह आत्मनिर्भर बन सका।
लाभुक मजीबुल शेख ने कहा, “मेरे लिए यह योजना सिर्फ खेती नहीं, बल्कि जीवन में नई रोशनी है। जो सपना वर्षों से मन में था, वह अब पूरा हो चुका है। जिला प्रशासन व आजीविका मिशन से मिले सहयोग के लिए मैं हृदय से आभारी हूं।” योजना से पहले उनकी वार्षिक आय 33,000 थी, जो अब बढ़कर 1,43,000 हो गई है। कुल आय में वृद्धि 1,10,000 रुपये दर्ज की गई। यह सफलता कहानी प्रमाण है कि सरकारी योजनाएं जब सही लाभुक तक पहुंचती हैं तो बंजर भूमि भी समृद्धि में बदल सकती है।
