द फॉलोअप डेस्क
झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होने के बावजूद राजस्व संग्रहण का लक्ष्य हासिल नहीं होने पर बीजेपी ने हेमंत सरकार को घेरा है। दरअसल, वित्तीय वर्ष 2022-23 तक के माह नवंबर तक के कुल लक्ष्य 1600 करोड़ रुपये के विरुद्ध राज्य कोषागार में 1084 करोड़ रुपए ही जमा हुए हैं। जो कि माह नवंबर तक के लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत है। बीजेपी विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पहले ही बताया था कि झारखंड में छत्तीसगढ़ की कंपनियों का प्रकोप है। वहीं अब उत्पाद विभाग अपना चेहरा छुपा रही है और कई कपनियों को टार्गेट नहीं पूरा करने के एवज में जुर्माना लगाया है। जबकि, इनमें से तीन ने हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ मामला भी दर्ज कर दिया है। इधर, शराब बेचने वाली मैन पावर कंपनियों का कहना है कि ब्रांडेड शराब की सप्लाई मिल ही नहीं रही तो टार्गेट कैसे पूरा करें। उन्होंने सीएम को ट्वीट कर मशवरा दिया है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जी, इससे पहले की आप इस शराब घोटाले के मामले में भी फँसकर एक और घोटाले का रिकार्ड अपने नाम कर लें, उठिये, जागिये और बिना देरी किये उन अफ़सरों पर कठोर कारवाई करिये जिन्होंने ने दिल्ली की तर्ज़ पर शराब घोटाले में आपकी गर्दन फँसाने का पक्का इंतज़ाम कर दिया है।

लूटपाट के खेल में राजस्व का हो रहा बड़ा नुकसान
बाबूलाल ने कहा कि झारखंड के सरकारी राजस्व में भारी नुकसान हो रहा है। आखिर दोषी कौन है ? उन्होंने सलाह दी है कि सीएम अगर उनके उठाये सवालों के पिछले 1 मई 2022 का ट्वीट को देखें तो उनकी सारी शंका का समाधान हो जाएगा। साथ ही कहा कि सरकारी व्यवस्था में जब घूस टार्गेट फिक्स कर पहले वसूल लिया जायेगा, तो सरकारी राजस्व का नुकसान तो होना ही है। और यही शराब के कारोबार में हो रहा है।

उत्पाद विभाग का दावा फेल
उन्होंने कहा कि मई में जब छत्तीसगढ़ी शराब पॉलिसी और पॉलिसी बनाने के लिए पहले चुनकर रखी गई कंपनियां आयीं, तो उनका गुणगान करने के लिए उत्पाद विभाग ने प्रेस कॉन्फ्रेंस किया। जिसमें दावा किया गया कि राजस्व अनुमान से ज्यादा आने लगा है। कोशिश की गई कि कम राजस्व का आशंका जताने वाले विपक्षियों को झूठा साबित किया जाए। लेकिन राजस्व संग्रहण के झूठे आंकड़े अखबारों में छपवाने के 2 महीने बाद ही उत्पाद विभाग की पोल खुल गई।