द फॉलोअप डेस्क
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर बोकारो की चार महिलाएं साहस और मेहनत की अनोखी मिसाल पेश कर रही हैं। CCL के ढोरी एरिया स्थित अमलो रेलवे साइडिंग में चरकी, कुन्नी कुमारी, गंगा और तुलसी भारी-भरकम फीडर ब्रेकर मशीनों का संचालन कर रही हैं और देश के विभिन्न पावर प्लांटों तक कोयला पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं। अमलो साइडिंग में चारों ओर कोयले की धूल की परत और हवा में उड़ते कणों के बीच लोहे की ऊंची सीढ़ियों के सहारे महिलाएं मशीन तक पहुंचती हैं और कोयले के बड़े-बड़े टुकड़ों को क्रश कर उत्पादन कार्य में जुटी रहती हैं। इसके बाद क्रश किया गया कोयला रेलवे वैगनों में लोड कर देश के अलग-अलग पावर प्लांटों तक भेजा जाता है। यहां रोजाना करीब चार से पांच हजार टन कोयले को क्रश किया जाता है। छह मशीनों वाले इस प्लांट में चार मशीनों का संचालन महिलाएं कर रही हैं।

कोयले की धूल से भरे माहौल और ऊंचाई पर बनी मशीनों तक पहुंचना किसी के लिए भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। लोहे की ऊंची और कोयले से ढकी सीढ़ियां चढ़कर ये महिलाएं रोज मशीन तक पहुंचती हैं और सुबह छह बजे से दोपहर दो बजे तक अपनी शिफ्ट में काम करती हैं।
इनमें से कुन्नी कुमारी पिछले आठ सालों से फीडर ब्रेकर मशीन चला रही हैं। इससे पहले वह अमलो साइडिंग में पीउन के पद पर कार्यरत थीं। वर्ष 2016 में ढोरी के तत्कालीन जीएम कोटेश्वर राव की प्रेरणा से उन्होंने मशीन चलाने की जिम्मेदारी संभाली। शुरुआत में थोड़ी झिझक जरूर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उन्होंने मशीन संचालन में महारत हासिल कर ली। आज वह मशीन में आने वाली तकनीकी खराबियों को भी खुद ही ठीक कर लेती हैं।
कोयले के काले गुबार और भारी मशीनों के बीच काम कर रही ये महिलाएं न सिर्फ अपने परिवार का सहारा बनी हैं, बल्कि यह भी साबित कर रही हैं कि मेहनत और हौसले के दम पर महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों के बराबर कदम से कदम मिलाकर चल सकती हैं।