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ANM-GNM कर्मचारियों का आमरण अनशन जारी, महिलाओं की स्थिति गंभीर, एक महिला अस्पताल में भर्ती

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रांची:
राज्य भर के एएनएम और जीएनएम अपनी मांगों को लेकर राजभवन के पास धरना प्रदर्शन पर बैठे हुए हैं। इनकी सालों से केवल एक ही मांग है कि उनको नियमित कर दिया जाए। इनके धरना पर बैठ जाने से विभिन्न जिलों के पीएचसी और सीएचसी में स्वास्थ्य कार्य बाधित हो गया है। बीते 17 जनवरी से ये लोग हड़ताल पर है। वहीं 24 जनवरी से अलग-अलग जिले से आई 21 कर्मी आमरण अनशन पर चले गए है। अनुबंध कर्मियों का कहना है कि वो सुदूर क्षेत्रों में भी और जीएनएम के द्वारा स्वास्थ्य सेवा पहुंचाया जाता है। कोरोना जैसी महामारी में अपनी जान को खतरे में डालकर लोगों का टीकाकरण किया गया। उनकी सेवा की गई। लेकिन, उन्हें लेकर सरकार कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। इस बार अनुबंध पर बहाल सभी स्वास्थ्यकर्मियों ने यह ठान लिया है कि जब तक सरकार उनको लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाती है, तब तक वह विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। आमरण अनशन पर गयी महिलाओं की स्थिति अब गंभीर होती जा रही है। प्रदेश महासचिव वीणा देवी को सांस लेने में तकलीफ होने के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हमें नियमित करने की कवायद तुरंत करें पूरी
स्वास्थ्य कर्मियों का कहना है कि आमरण अनशन के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा था। 3 साल तक मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से निवेदन किया। उनके दरवाजे पर दौड़ते रहे। उनसे आग्रह करते रहे कि हमें नियमित कर दीजिए, अपना वादा पूरा कीजिए। लेकिन सीएम ने हमारी नहीं सूनी। 16 साल में 16 हजार वेतन की नौकरी में हमारा घर नहीं चलता। इलाज की तो बात ही नहीं कीजिए। 16 जनवरी को हमने सीएम हाउस के घेराव किया। ताकि सीएम से हमारी हो सकी। बात करने के बाद हमें नियमित करने की कवायद तुरंत पूरी करें। हमें पिछले 16 साल से इंतजार कर रहे है। कई बहने की उम्र भी अब निकल गई है।कितने की मौत हो गई। हमने हर परिस्थिति में अपना काम किया। कोरोना काल में भी हमने काम किया लेकिन आज यह स्थिति है कि सीएम ने हमसे मिलने से इंकार कर दिया। इनसे मिलने के लिए सरकार सकी ओर से अबतक कोई नहीं आया है। इनका कहना है कि सरकार छिपाने की कोशिश कर रही है लेकिन उनका काम पूरे तरीके से ठप है।

सरकार कर रही है बाहरी भीतरी की बात
महिलाओं का कहना है कि जो हमें सरकार दे रही है उससे हमारा घर नहीं चलता है। क्या हमारे बच्चे अच्छे स्कूल में नहीं पढ़ेगे, क्या हम पौष्टिक खाना नहीं खाएंगे। हम क्या यहां के नागरिक नहीं हैं। क्या हमारा दोष यह है कि हम स्वास्थ्य सेवा दे रहे हैं। हम जब दूसरे को सेवा का दे रहे है तो हमारे स्वास्थ्य का ख्याल सरकार को रखना चाहिए। आप यहां बाहरी भीतरी की बात करते हैं। हमने यहां से पढ़ाई की है। हमारा जाति-आवसीय प्रमाण पत्र यहां का है। हम कैसे बाहरी हुए।कोरोना काल के समय बाहर से मजदूरो का यहां बुलाया गया। अब ऐसी स्थिति हो गई है कि हम यहां से पलायन करें। अगर हम यहां से पलायन भी करते हैं कि कहां की सरकार हमें नौकरी देंगी।

 

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