डेस्क:
राज्य सरकार के नियोजन नीति (policy planning) रद्द होने पर राज्य में हजारों नियुक्तियां थम गई है। इसे लेकर युवा काफी आक्रोश में है। ट्विटर पर आज सुबह से ही नियोजन नीति पर जवाब दो नहीं तो इस्तीफा दो का हैशटैग (Hastag On twitter) ट्रेंड (Trending on Twitter) कर रहा है। नियोजन के लेकर युवा लगातार सरकार से सवाल कर रहे हैं। साथ ही इससे जुड़े हजारों ट्वीट अबतक किए जा चुके हैं। कई मीम भी वायरल हो रही है। छात्र नियोजन नीति को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में आज ट्विटर पर सीएम सोरेन को अपने वादों को याद दिलाते हुए लोग लगातार ट्वीट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा है कि आख़िर कब होगा ये वादा पूरा। झारखंड के युवा मांगे अपना अधिकार, अब तो होश में आओ सरकार। वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि जानबूझकर गलत नियोजन नीति बनाना फिर केस में फसाना सब समझ आ रहा हमें।
जानबूझकर गलत नियोजन नीति बनाना फिर केस में फसाना सब समझ आ रहा हमें ????????#नियोजन_नीति_पे_जवाब_दो_या_इस्तीफा_दो#नियोजन_नीति_पे_जवाब_दो_या_इस्तीफा_दो #नियोजन_नीति_पे_जवाब_दो_या_इस्तीफा_दो@HemantSorenJMM @JmmJharkhand @RajeshThakurINC @Alamgircongress @ChampaiSoren @SitaSorenMLA pic.twitter.com/xkxPCGnxyE
— Aryan Raaz (@raaz_13) January 8, 2023
#नियोजन_नीति_पे_जवाब_दो_या_इस्तीफा_दो pic.twitter.com/QQzXPhy6F6
— MITHLESH KUMAR (Mithun) (@mithlesh_122) January 8, 2023
क्या है मामला
जानकारी हो कि हाईकोर्ट ने असंवैधानिक बताते हुए नियोजन नीति को रद्द कर दिया था। गौरतलब है कि झारखंड सरकार द्वारा बनाई गई नियोजन नीति में ये प्रावधान किया गया था कि राज्य के तृतीय और चतुर्थवर्गीय नौकरियों में उन्हीं अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा जिन्होंने 10वीं और 12वीं की परीक्षा झारखंड से पास की हो। हालांकि, आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों के लिए ये बाध्यता नहीं थी। वहीं भाषा को लेकर भी विवाद हुआ था। क्षेत्रीय भाषा की सूची से हिंदी को हटाकर उर्दू को शामिल करने को लेकर भी विवाद था। हाईकोर्ट ने थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों में 10वीं और 12वीं की अनिवार्यता को संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन बताया और असंवैधानिक बताते हुए इसे खारिज कर दिया। इस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि नियोजन नीति छात्रहित में बनाई गई थी। सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपील करेगी।

विपक्ष ने भी घेरा
इसे लाकर छात्रों के साथ साथ विपक्ष ने भी सरकार के घेरना शुरू कर दिया है। इसे लेकर भाजपा विधायक दल के नेता बाबूलाल मरांडी ने ट्वीट किया है। उन्हों ट्वीट कर लिखा है कि न राज्य में पांच लाख नौकरी मिली, न बेरोजगारों को भत्ता और न ही खुलेआम नौकरी नहीं तो राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री का इस्तीफा आया। आखिर मुख्यमंत्री बिना नियोजन नीति के राज्य के युवाओं को कैसे नौकरियां देंगे। इसके साथ ही उन्होंने सीएम हेमंत सोरेन के एक ट्वीट को भी साझा किया है।

छात्रों ने सरकार को दिया था 24 दिसंबर तक का अल्टीमेटम
युवाओं का आरोप है कि सरकारें जानबूझकर ऐसी नियोजन नीति बनाती है जो आगे जाकर कोर्ट से खारिज हो जाती है। सरकार की मंशा रोजगार देने की नहीं लगती। छात्र-छात्राओं की मांग थी कि हेमंत सरकार जल्द से जल्द ठोस नियोजन नीति लाकर रिक्त पदों पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करे, अन्यथा बड़ा आंदोलन होगा। झारखंड यूथ एसोसिएशन के संयोजक सफी इमाम ने 24 दिसंबर 2022 तक नियोजन नीति को लेकर कोई ठोस फैसला लाने का समय दिया था। लेकिन सरकार ने आश्वासन के बाद भी कुछ नहीं किया।