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स्वास्थ्य विभाग का टेंडर : बाबूलाल मरांडी ने उठाया पारदर्शिता पर प्रश्न, उच्च स्तरीय जांच की मांग

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रांची

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है। सोरेन को भेजे गए एक पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि स्वास्थ्य विभाग की टेंडर प्रक्रिया में सुनियोजित लूट और पक्षपात हुआ है। कहा है कि विभाग ने दिसंबर 2024 से अब तक GEM पोर्टल के माध्यम से 11 टेंडर निकाले, जिनमें अनुचित तरीके से कुछ चुनिंदा कंपनियों को लाभ दिया गया है।
टेंडर सूची इस प्रकार है:
1.    GEM/2024/B/5748485 (सिविल सर्जन दुमका)
2.    GEM/2024/B/5758754 (सिविल सर्जन रांची)
3.    GEM/2025/B/5895644 (सिविल सर्जन जामताड़ा)
4.    GEM/2025/B/5919778 (सिविल सर्जन जामताड़ा)
5.    GEM/2025/B/5920544 (सिविल सर्जन बोकारो)
6.    GEM/2025/B/6012458 (सिविल सर्जन बोकारो)
7.    GEM/2025/B/6012441 (सिविल सर्जन बोकारो)
8.    GEM/2025/B/6013926 (सिविल सर्जन दुमका)
9.    GEM/2025/B/6017607 (सिविल सर्जन देवघर)
10.    GEM/2025/B/6021839 (सिविल सर्जन सरायकेला खरसावाँ)
11.    GEM/2025/B/6022047 (सिविल सर्जन जामताड़ा)


पत्र में मुख्य आरोप इस तरह हैं:
•    सभी 11 टेंडर सिर्फ तीन कंपनियों — Hind Infraproject Pvt. Ltd., Bharat Art & Supplier, और Global Arts & Suppliers — को दिए गए।
•    ये सभी कम्पनियाँ एक ही पते (Irgu Road, Pahari Tola, Ranchi) पर पंजीकृत हैं, जो मिलीभगत और फर्जीवाड़े की ओर संकेत है।
•    इन कंपनियों के निदेशक/प्रोप्राइटर एक ही परिवार से हैं — ख्वाजा अब्दुल गुदिर अहमद बट, ख्वाजा मोहसिन अहमद और फ़रहान अहमद बट।
•    ख्वाजा मोहसिन अहमद एक ही समय में दो कंपनियों का निदेशक/प्रोप्राइटर है।
•    जब किसी अन्य कंपनी ने भाग लेने की कोशिश की, तो उसे तकनीकी आधार पर अयोग्य घोषित कर दिया गया।
•    बोलियों (रेट्स) में मामूली अंतर रहा, जो यह दर्शाता है कि दरें कहीं से तय की गई हों।
•    चिकित्सकीय सामानों और सुविधाओं की वास्तविक बाजार कीमत से कहीं अधिक भुगतान हुआ।
•    GEM पोर्टल की नियमावली Clause 29 का उल्लंघन हुआ क्योंकि एक ही व्यक्ति/समूह से जुड़ी कंपनियों की बोलियाँ तकनीकी परीक्षण में निरस्त हो जानी चाहिए थीं, लेकिन उन्हें योग्य घोषित कर दिया गया।
पत्र में कहा गया है कि यह संपूर्ण मामला स्वास्थ्य मंत्री  इरफान अंसारी के संरक्षण में हुआ और दोषी पाए जाने पर FIR दर्ज कर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।


 

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