द फॉलोअप डेस्क
इन दिनों झारखंड में नियोजन नीति का मुद्दा गर्माया हुआ है। युवा सड़के पर सरकार की 60-40 नियोजन नीति का जमकर सड़कों पर विरोध कर रहे हैं। इसी बीच भाजपा विधायक दल के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मारंडी ने भी मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि जिस दिन भाजपा की सरकार बनेगी उस दिन थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी झारखंड के बच्चों को दे देंगे। उन्होंने कहा है कि इस बात की मैं 100 प्रतिशत गारंटी लेता हूं। उन्होंने आगे हेमंत सोरेन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि हेमंत सोरेन ने सत्ता में आने से पहले छात्रों और झारखंड के लोगों को बड़े-बड़े सपने दिखाए थे। जब सत्ता में आए तो अपनी तिजोरी भरने में लग गए और सारे वादे भूल गए। जब उन्हें उनके वादे याद दिलाने के लिए छात्र सड़क पर उतर रहे हैं तो उनपर डंडा बरसाया जा रहा है। उनके सर फोड़ रहे हैं। इसके लिए हमलोग लगातार सवाल उठा रहे हैं।

सरकारी जॉब को प्रोटेक्ट दे सरकार
बाबूलाल ने कहा कि हम लोगों ने बार-बार सरकार से कहा था कि कानून के परिधि में रहकर काम करें। जिस प्रकार से अन्य राज्यों के बच्चों के लिए वहां की सरकार सरकारी जॉब को प्रोटेक्ट कर रही है। वैसे ही हेमंत सोरेन को भी अपने राज्य के बच्चों के लिए यहां की सर्विस को सुरक्षित करना चाहिए। लेकिन हेमंत सोरेन को तो राजनीति करनी है। अब आप अगल-बगल के राज्यों में ही देख लिजिए। बिहार- छत्तीसगढ़ में सरकार ने अपने राज्य के बच्चों के लिए सरकारी नौकरी को सुरक्षित कर रखा। वहां कहां बाहर के बच्चे जाकर नौकरी कर रहे हैं। जब सभी राज्य अपने बच्चों के नौकरी को सुरक्षित कर रहे हैं। तो झारखंड सरकार क्यों नहीं कर सकती। हेमंत सोरेन सरकार को कानून की परिधि में ऐसा करना चाहिए था।

झारखंड से ही 10-12वीं की अनिवार्यता गलत
बाबूलाल ने थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरियों के लिए झारखंड से ही 10-12वीं पास करने की अनिवार्यता को गलत बताते हुए कहा कि हमने पहले ही सरकार से आग्रह किया था कहा था कि कोर्ट में आपकी यह नीति 1 मिनट भी नहीं टिकेगा। हेमंत सरकार ने नियोजन नीति भी बनाया तो उसमें भी हिंदी और बाकी भाषा को हटाकर उर्दू रख दिया। उस पर भी हम लोगों ने सवाल उठाया था। बाबूलाल ने आगे कहा कि जब रघुवर दास की सरकार आई थी तब उन्होंने भी प्रोटेक्शन दिया था। रघुवर दास ने अगले 10 वर्षों तक पूरी थर्ड और फोर्थ ग्रेड की नौकरी को उन्होंने फ्रीज कर दिया था। इस नौकरी के लिए बाहर के कोई भी लोग आवेदन नहीं दे पा रहे थे। लेकिन हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री बनते ही इसे समाप्त कर दिया।
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