द फॉलोअप डेस्क:
इंग्लिश में एक और कहावत है मैजिक हैप्पेंस टू दोज़ हु बिलीव इन ईट, यानि की चमत्कार उन्हीं के साथ होता है जो उसपर भरोसा करते हैं। आइये आप को ले चलते हैं गढ़वा के एक ऐसे घर में जहां एक अर्थी सजी हुई है। आंगन में बैठी एक औरत का रो-रो कर बुरा हाल है। औरत बार बार अपना होश खो बैठती है। जब होश आता है दोबारा रोने लगती है। अचानक से औरत की चींख निकल पड़ती है। वो चिल्लाई अरे देखो, अपना लल्ला तो जिंदा है...। मौके पर मौजूद रिश्तेदारों को लगा की बेटे के गम में मां अपना आपा खो बैठी है। लेकिन लड़के को सामने खड़ा देखकर लोग विश्वाश करने को मजबूर हो गए की जिसके नाम की उन्होंने अर्थी सजा राखी थी, असल में वह उनके सामने खड़ा था..वह भी जिंदा। बेटे के जीवित पाकर मां ने उसे सीने से लगा लिया लेकिन आंसू नहीं थमे। बस अंतर इतना था कि उस वक्त के आंसु गम के थे और अब खुशी के... जिस बेटे के अंतिम संस्कार की तैयारी हो गई थी, वह लौट आया था। इसे देख गम का माहौल खुशी में बदल गया। मेरी यह पूरी बात सुनकर आप हैरान रह गए होंगे। लेकिन यह सच है। उस मां का मरा बेटा लौटकर घर आ गया था।

पिता ने खोद ली थी बेटे की कब्र
मामला जिले के मेराल थाना क्षेत्र के गोंदा गांव का है। यहां अपने 17 वर्षीय बेटे की मौत पर एक मां का रो-रोकर बुरा हाल था। मां बार-बार बेहोश हो रही थी। वहां मौजूद लोग मां का ढांढस बांध रहे थे। उधर, पिता ने पोस्टमार्टम के बाद बेटे के शव को रिसीव कर लिया था। घर पर अंतिम संस्कार की तैयारियां पूरी कर ली गई थीं। कब्र भी खोद ली गई थी। तभी अचानक उनका पुत्र आकर्षण शमशान घाट पर पहुंच गया। आकर्षण को देखकर सभी लोगों की आंखें फटी रह गई। बेटे को जीवित देखकर मां की खुशी का तो कोई ठिकाना ही नहीं रहा था। परिजनों ने आकर्षण को देखा तो कुछ देर के लिए उन्हें अपनी आंखों पर विश्वास नहीं हुआ। लड़के को जीवित देख घर वालों ने भगवान को शुक्रिया कहा।
व्हाट्सएप के जरीये पिता को मिली थी जानकारी
दरअसल, बीते शुक्रवार को एनएच-75 पर पिकअप से बाइक की टक्कर में 2 युवकों की मौत हो गई जबकि 1 घायल हो गया था। स्थानीय लोगों की मदद से घायल को इलाज के लिए सदर अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे बेहतर इलाज के लिए मेदिनीनगर रेफर कर दिया। घायल युवक आकर्षण का दोस्त था। सड़क हादसे की जानकारी मिलने पर आकर्षण अपने घायल दोस्त राहुल दास का हालचाल जानने मेदिनीनगर पहुंचा। वहां उसे पता चला कि उसे रिम्स रांची रेफर कर दिया गया है। दूसरी तरफ घटना की व्हाट्सएप से जानकारी आकर्षण के पिता राजदेव बाड़ा को दी गई। उन्हें पहचान के लिए उक्त घटना में मृत जितेंद्र कुमार की तस्वीर भेजी गई। गलती से आकर्षण के पिता ने उक्त तस्वीर को अपने बेटे आकर्षण का शव समझ लिया।

गम का माहौल खुशी में बदला
इसके बाद राजदेव बाड़ा अपने अन्य परिजनों के साथ भागे-भागे सदर अस्पताल पहुंचे, जहां पोस्टमार्टम के बाद जितेंद्र कुमार के शव को रिसीव भी कर लिया। वहीं, आकर्षण मेदिनीनगर से यात्री बस पकड़ कर अपने घर खजुरी पहुंचा। इस दौरान अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे लोग आकर्षण को देख अचंभित रह गए। उन्हें अपनी आंखों पर यकीन ही नहीं हो रहा था। आकर्षण भी अपने अंतिम संस्कार की व्यवस्था देख हैरान हो गया। गम का माहौल अचानक खुशी में बदल गया। इसके बाद इसकी सूचना गढ़वा थाना को दी गई, तब तक मृतक जितेंद्र के भी परिजन गढ़वा पहुंच चुके थे। प्रशासन की उपस्थिति में जितेंद्र कुमार का शव उन्हें सौंप दिया गया।