द फॉलोअप डेस्क
प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरीय अधिकारी निरंजन शर्मा ने कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट को लेकर आम जनता, मध्यम वर्ग, किसान और युवाओं में निराशा देखी जा रही है। जिस उम्मीद के साथ लोगों ने इस बजट की ओर नजरें टिकाई थीं, वह पूरी तरह से टूटती नजर आई। महंगाई, बेरोजगारी और बढ़ती रोजमर्रा की जरूरतों के बीच आम आदमी को राहत देने के लिए बजट में कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया। बजट में पेट्रोल-डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण को लेकर कोई स्पष्ट नीति सामने नहीं आई। मध्यम वर्ग को आयकर में छूट की उम्मीद थी, लेकिन टैक्स स्लैब में कोई बड़ा बदलाव न होने से वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। वहीं सरकारी कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए भी कोई विशेष घोषणा नहीं की गई।

किसानों को लेकर भी बजट निराशाजनक साबित हुआ। फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य, सिंचाई और कृषि लागत कम करने के लिए कोई ठोस रोडमैप नहीं दिखा। युवा वर्ग, जो रोजगार और स्वरोजगार की उम्मीद लगाए बैठा था, उसे भी बजट से मायूसी हाथ लगी। न तो बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन की घोषणा हुई और न ही स्टार्टअप्स व छोटे उद्योगों के लिए कोई प्रभावी पैकेज सामने आया। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में भी अपेक्षित बजट वृद्धि नहीं की गई, जिससे भविष्य को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह बजट कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देता नजर आ रहा है, जबकि आम जनता की समस्याओं को नजरअंदाज किया गया है। बढ़ती महंगाई, घटती क्रयशक्ति और रोजगार संकट के बीच यह बजट आम आदमी के लिए राहत की बजाय निराशा का कारण बन गया है।
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