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चाईबासा ट्रेजरी घोटाला : आरक्षी लेखपाल ने 9 सालों तक की खातों में सेंधमारी, 4 भेजे गए जेल

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चाईबासा
चाईबासा ट्रेजरी से पुलिस विभाग के खातों के जरिए 26 लाख रुपये की अवैध निकासी की पुष्टि हुई है. मुफ्फसिल थाना पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी आरक्षी लेखापाल देवनारायण मुर्मू समेत चार लोगों पूर्वी सिंहभूम निवासी आरोपी के जीजा अरुण कुमार मार्डी, साला सरकार हेंब्रम तथा ओडिशा के मयूरभंज निवासी उसके दोस्त गोराचांद मार्डी को भी गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया. 
9 सालों तक सरकारी राशि की हुई अवैध निकासी 
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपी ने करीब 9 वर्षों तक विभागीय कंप्यूटर डेटा से छेड़छाड़ कर सरकारी राशि अपने, रिश्तेदारों और दोस्तों के खातों में ट्रांसफर करायी. इस मामले में चाईबासा ट्रेजरी अफसर सुमित कुमार सिंह के बयान पर मुफ्फसिल थाना में प्राथमिकी दर्ज की गयी है. प्राथमिकी में गोइलकेरा थाना में पदस्थापित आरक्षी लेखापाल देवनारायण मुर्मू के अलावा उसके रिश्तेदारों और सहयोगियों को आरोपी बनाया गया है. जांच के अनुसार, देवनारायण मुर्मू वर्ष 2016 से चाईबासा एसपी कार्यालय की लेखा शाखा में कार्यरत था. इसी दौरान उसने विभागीय डेटा में हेराफेरी कर भुगतान प्रक्रिया का दुरुपयोग करना शुरू किया. किसी पुलिसकर्मी की मृत्यु के बाद आश्रितों को मिलने वाली राशि के भुगतान के समय वह बैंक खाता संख्या बदलकर अपने परिचितों के खाते जोड़ देता था. इसके अलावा पुलिसकर्मियों के यात्रा भत्ता (टीए) की राशि भी निजी खातों में ट्रांसफर कर ली जाती थी.
9 साला में 26 लाक रुपये से अधिक की गड़बड़ी
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने अपने वेतन खाते के अलावा एक अतिरिक्त बैंक खाता विभागीय डेटा में अपलोड कर रखा था, जिसमें भी सरकारी राशि भेजी जाती थी. वर्ष 2017 से 2025 के बीच उसने कुल 26 लाख 21 हजार 717 रुपये की अवैध निकासी की. मुख्य आरोपी देवनारायण मुर्मू पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका (कोवाली) थाना क्षेत्र स्थित माको गांव का निवासी है. उसने पूछताछ में बताया कि वर्ष 2011 में उसकी पुलिस विभाग में नियुक्ति हुई थी. लेखा शाखा में कार्य करने के दौरान उसने डेटा में हेरफेर की तकनीक सीखी और उसी का इस्तेमाल कर सरकारी राशि का गबन करता रहा. जांच एजेंसियों के अनुसार, गबन की राशि का इस्तेमाल आरोपी ने अपनी “किंग फिशर एफसी” नामक फुटबॉल टीम को चलाने में किया. अवैध कमाई से वह खिलाड़ियों की खरीद-फरोख्त और टीम संचालन में पैसा खर्च करता था. अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस पूरे खेल में और कौन-कौन लोग शामिल थे.

 

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