द फॉलोअप डेस्क
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इचाक में गर्भवती महिला से पांच हजार रुपये वसूली और मारपीट किए जाने का मामला गंभीर रूप लेता जा रहा है। पीड़िता द्वारा लिखित शिकायत और एक्स पर मामला उछलने के बाद प्रशासन हरकत में आ गया है। पीड़िता के परिजनों ने ट्विटर पर अखबार की कटिंग, आवेदन और घटना को साझा कर न्याय की गुहार लगाई है। जिसके बाद मामले पर संज्ञान लेते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हजारीबाग डीसी को तत्काल कार्रवाई का निर्देश दिया। इसके बाद जिला प्रशासन के निर्देश पर इचाक थाना में संबंधित कर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली है। वहीं सोमवार को सिविल सर्जन अशोक कुमार और प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार की संयुक्त टीम ने अस्पताल पहुंचकर पूरे मामले की जांच की। और कानूनी प्रावधानों के तहत आगे की कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं सीएस और बीडीओ की संयुक्त जांच के दौरान अधिकारियों ने ड्यूटी पर मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों, पीड़िता के परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों से अलग-अलग पूछताछ की।
अस्पताल रजिस्टर और संबंधित कागजातों की भी जांच की गई। प्रारंभिक जानकारी में प्रसव के नाम पर अवैध वसूली और अभद्र व्यवहार की शिकायतें पर सभी दृष्टिकोण से जांच शुरू कर दी गई है। जांच के दौरान सीएस ने बताया कि मारपीट का आरोप प्रथम दृष्टि में गलत प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि प्रसूति महिला को पीपीएच की आशंका के कारण रेफर किया गया था, हालांकि रास्ते में स्थिति सामान्य हो गई थी। सीएस के अनुसार, पैसा लेन-देन की कोई स्पष्ट बात सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी बताया कि पीड़िता समय से पहले छुट्टी मांग रही थी और इसी को लेकर विवाद की स्थिति बनी। पीड़िता द्वारा 300 रुपये देकर छुट्टी करने की बात सामने आई, मगर आरोपित कर्मियों द्वारा पैसे मांगने की पुष्टि नहीं हुई है। साथ ही पीड़िता के द्वारा विभाग को कोई आवेदन नहीं दिया गया।
प्रखंड विकास पदाधिकारी संतोष कुमार ने कहा कि दोनों पक्षों के बयान लिए जा चुके हैं और मामले की आगे जांच की जा रही है। जांच टीम ने बताया कि सीएचएसी इचाक से स्पष्टीकरण मांगा गया है। पीड़िता का पक्ष लिया गया है और स्वास्थ्यकर्मी से भी पूछताछ जारी है। जिसके बाद जांच रिपोर्ट तैयार कर जिला प्रशासन को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर दोषी पाए जाने वाले पर कठोर कार्रवाई तय मानी जा रही है। वहीं एएनएम अंजू कुमारी और जीएनएम जॉय ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्होंने किसी प्रकार का दुर्व्यवहार नहीं किया है और मामले को बेबुनियाद बताया। फिलहाल पुलिस और प्रशासनिक जांच जारी है, जिसके बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। सीएचसी प्रभारी डॉ एंजल स्वाति गुड़िया ने कहा कि मुझे मीडिया के माध्यम से इस मामले की जानकारी मिली। जिसके तुरंत बाद मामले में शामिल दोनों स्वास्थ्यकर्मी एएनएम और जीएनएम को लेबर रूम से हटा दिया गया है।
बता दें कि बीते 29 नवंबर को इचाक थाना क्षेत्र के लुंदरू गांव निवासी पार्वती देवी प्रसव पीड़ा के साथ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचीं। परिजनों का आरोप है कि स्वास्थ्यकर्मियों ने प्रसव कराने के लिए 5,000 रुपये की मांग की। पैसे नहीं देने पर महिला के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की गई। समय पर उपचार न मिलने से उनकी स्थिति बिगड़ गई, जिसके बाद परिजनों ने उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया। घटना के बाद स्थानीय लोगों में रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्पताल में अवैध वसूली और लापरवाही की घटनाएं नई नहीं हैं। लोगों ने स्वास्थ्य केंद्र में नियमित निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित करने और दोषी कर्मियों को बर्खास्त करने की मांग की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और मरीजों के साथ दुर्व्यवहार किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
