द फॉलोअप डेस्क
केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर पूर्वी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय श्रम मंत्री मनसुख मांडविया का पुतला दहन किया। कांग्रेसजनों का आरोप है कि भाजपा सरकार मजदूरों को उनके बुनियादी अधिकारों से वंचित कर रही है और नए कानून देश को फिर से बंधुआ मजदूरी की ओर ले जा रहे हैं।
प्रदर्शन के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष परविंदर सिंह और श्रमिक संगठनों से जुड़े नेताओं ने कहा कि मोदी सरकार ने श्रमिकों की सुरक्षा, सम्मान और अधिकारों का हनन किया है। उन्होंने कहा कि नए कानूनों के लागू होने के बाद फैक्ट्री इंस्पेक्टरों की शक्तियों को लगभग समाप्त कर दिया गया है। अब औचक निरीक्षण, सुरक्षा जांच, कैंटीन व श्रमिक सुविधाओं के निरीक्षण सहित कई महत्वपूर्ण अधिकार छीन लिए गए हैं, जिससे मजदूरों का शोषण बढ़ेगा और उद्योगों में असुरक्षा का माहौल बनेगा।
कांग्रेस नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार यूनियन गठन के अधिकार को समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है। पूर्व प्रावधानों के तहत किसी भी संस्थान में सात कर्मचारी होने पर यूनियन का गठन संभव था, लेकिन अब यह अधिकार लगभग समाप्त जैसा हो गया है। साथ ही, आंदोलन और धरने के अधिकार पर भी अंकुश लगाया गया है। पूर्व व्यवस्था में केवल सूचना देकर श्रमिक विरोध दर्ज करा सकते थे, लेकिन अब सरकार से अनुमति अनिवार्य कर दी गई है, जिसे कांग्रेस नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया।
नेताओं ने कहा कि सरकार ने कार्य अवधि बढ़ाकर 12 घंटे कर दी है, जिससे मजदूरों का शारीरिक, मानसिक और पारिवारिक जीवन प्रभावित होगा। उन्होंने इसे आधुनिक समय की गुलामी और मजदूरों के हितों पर हमला बताया। विरोध प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता शामिल हुए। मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष विजय खान, आनंद बिहारी दुबे, डॉ. परितोष सिंह, रियाजुद्दीन खान, राजकिशोर यादव, शशि कुमार सिन्हा, ब्रजेन्द्र तिवारी, रजनीश सिंह, जसवंत सिंह जस्सी, चिन्ना राव, गुरदीप सिंह, विश्वजीत जेना, रविंद्र मौर्या सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
