द फॉलोअप डेस्क
पूर्व डिप्टी मेयर सह कांग्रेस नेता नीरज सिंह हत्याकांड मामले में आज कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। पुरे आठ साल, पांच माह, 26 दिन बाद कोर्ट इस पर अपना फैसला सुनाने वाली है। धनबाद एमपी-एमएलए न्यायालय के विशेष न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की बेंच इस केस में अपना फैसला सुनाएगी। दरअसल झरिया के तत्कालीन विधायक संजीव सिंह पर नीरज सिंह सहित 4 लोगों की हत्या कराने का आरोप है। जिसके बाद वह आठ साल से ज्यादा समय तक जेल में रहे। बीते आठ अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें बेल दी थी और उसके बाद बीते 11 अगस्त को जेल से बाहर निकले। .jpeg)
वहीं इसको लेकर प्रशासन पूरी तरह सख्त नज़र आ रही है। कोर्ट के बाहर और रणधीर वर्मा चौक से डीआरएम चौक तक धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू करने का आदेश जारी कर दिया गया है। इसके तहत पांच या उससे अधिक व्यक्ति एक साथ इकट्ठे नहीं रह सकेंगे। .jpg)
पूरा मामला
बता दें कि नीरज सिंह धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर थे और कांग्रेस पार्टी के नेता थे। वह झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह के चचेरे भाई थे। दोनों परिवारों के बीच राजनीतिक और कोयला कारोबार में वर्चस्व को लेकर पुराना झगड़ा था। जिसके बाद 21 मार्च 2017 की रात, नीरज सिंह अपनी फॉर्च्यूनर कार से घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी गाड़ी धनबाद के स्टील गेट इलाके में स्पीड ब्रेकर पर धीमी हुई, अपराधियों ने उन्हें चारों ओर से घेर लिया और उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। 
इस घटना में नीरज सिंह, उनके निजी बॉडीगार्ड मुन्ना तिवारी, ड्राइवर घलटू और उनके एक करीबी समर्थक अशोक यादव की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। मिली जानकारी के अनुसार पोस्टमार्टम में नीरज सिंह के बॉडी से 17 गोलियां निकाली गई थीं। नीरज सिंह के चचेरे भाई और झरिया के तत्कालीन विधायक संजीव सिंह को इस हत्याकांड का मुख्य आरोपी बनाया गया था।
नीरज सिंह के भाई अभिषेक सिंह ने संजीव सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी थी। जिसके संजीव सिंह ने 11 अप्रैल 2017 को धनबाद कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था और तब से वह जेल में थे। और हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले के मुख्य आरोपी संजीव सिंह को जमानत दी है, जिसके बाद वे करीब 8 साल बाद जेल से बाहर आए हैं।