बोकारो
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित 'फ्लोरिश स्टे बी एंड बी' होटल में लगी भीषण आग में बोकारो जैनामोड़ की 26 वर्षीय होनहार छात्रा श्रुतिका बरनवाल उर्फ सुरभि की दर्दनाक मौत हो गई। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS), मुंबई की छात्रा और विकास आटा चक्की के मालिक रमेश कुमार बरनवाल की इकलौती बेटी श्रुतिका, दिल्ली में एक इंटरव्यू और प्रोजेक्ट के सिलसिले में आई हुई थी। गुरुवार को उसका पार्थिव शरीर पैतृक आवास लाया गया, जिससे परिवार और स्थानीय लोग शोक में डूब गए।
मां से फोन पर बात कर रही थी, तभी लगी आग
3 जून की सुबह की घटना है, जब श्रुतिका होटल के कमरे में मौजूद थी और अपनी मां से फोन पर बात कर रही थी। इसी दौरान अचानक होटल में आग लग गई और चारों तरफ अफरातफरी मच गई। खतरे को भांपते हुए श्रुतिका ने फोन पर ही अपनी मां से मदद के लिए गुहार लगाई। लेकिन बातचीत के दौरान ही उसका मोबाइल हाथ से गिर गया और कॉल कट हो गया, जिसके बाद परिवार वालों का उससे कोई संपर्क नहीं हो पाया ।
तीसरी मंजिल पर फंसी, बाहर निकलने का नहीं मिला मौका
परिजनों के अनुसार, आग होटल के निचले हिस्से में लगी थी जो तेजी से ऊपर की ओर फैलती चली गई। देखते ही देखते आग की लपटें थर्ड फ्लोर तक पहुंच गईं, जहां श्रुतिका ठहरी हुई थी। आग और धुएं के विकराल रूप के कारण उसे कमरे से बाहर निकलने का मौका ही नहीं मिल सका। बाद में शव की पहचान करने में भी परिजनों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
अस्पतालों में तलाश के बाद मैक्स में मिली जानकारी
होनहार बेटी से संपर्क नहीं होने के बाद दिल्ली में मौजूद परिजनों ने बदहवास हालत में उसकी तलाश शुरू की। उन्होंने दिल्ली के AIIMS, सफदरजंग और कई अन्य निजी अस्पतालों के चक्कर काटे। काफी खोजबीन के बाद उन्हें जानकारी मिली कि श्रुतिका को मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, तब तक उसकी हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी और डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद कुछ ही देर में उसने दम तोड़ दिया।
करियर के सिलसिले में आई थी दिल्ली
श्रुतिका इंजीनियरिंग करने के बाद मुंबई की एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रही थी और साथ ही वह टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, मुंबई के स्कूल ऑफ हैबिटेट स्टडीस में 'वाटर पॉलिसी एंड गवर्नेंस' प्रोग्राम (2024-2026) की छात्रा भी थी। वह अक्सर अपने प्रोजेक्ट जमा करने और इंटरव्यू के लिए मुंबई से दिल्ली आया करती थी और इस बार भी वह रविवार को दिल्ली आई थी, जहां रात में अपनी दीदी के घर रुकने के बाद सुबह इंटरव्यू और प्रोजेक्ट के सिलसिले में मालवीय नगर के उक्त होटल पहुंची थी, लेकिन बुधवार को ट्रेन से उसकी वापसी के टिकट से पहले ही यह हादसा हो गया। इस दुखद घटना के बाद पोस्टमार्टम और कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा कर गुरुवार सुबह करीब 11 बजे श्रुतिका का पार्थिव शरीर जैनामोड़ स्थित उसके पैतृक आवास लाया गया, जहां इकलौती बेटी का शव घर पहुंचते ही माता-पिता और परिजनों और स्थानीय लोगों शोक का महोल बन गया। व्यवसायियों और बरनवाल समाज के लोगों ने पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर अपनी गहरी शोक संवेदना व्यक्त की।