द फॉलोअप डेस्क
भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष समीर उरांव ने आज मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर बड़ा हमला किया है। उरांव ने कहा कि गरीब आदिवासियों को लूटने वाले हेमंत सोरेन आपने बचाव में अब भावनात्मक मुद्दा उठाकर आदिवासी कार्ड खेल रहे। जिसे राज्य का आदिवासी भली भांति समझ चुका है। मुख्यमंत्री के परिवार का खरीद बिक्री को लेकर पुरानी आदत रही है। पहले इनलोगों ने झारखंड आंदोलन को ही बेच दिया। आज झारखंड की स्मिता को बेच रहे और जमीन खरीद रहे हैं। अपने दलालों,बिचौलियों के माध्यम से पत्थर, बालू,कोयला लोहा सब बेचकर अपनी तिजोरी भर रहे।

इनकी सरकार बनते ही चाईबासा में 7आदिवासियों की नृशंस हत्या हुई
उन्होंने कहा कि आदिवासी का मतलब होता है स्वाभिमानी, परोपकारी, अन्याय अत्याचार के खिलाफ लड़ने वाला। यह समाज भगवान बिरसा मुंडा,अमर शहीद सिद्दो कान्हू चांद भैरव तिलका मांझी,वीर बुधु भगत ,नीलांबर पीतांबर का वंशज है। लेकिन मुख्यमंत्री अपने सोरेन परिवार की विशेषताओं को आदिवासी समाज से जोड़ कर बता रहे हैं। जिसे बंद करना चाहिए। इससे आदिवासी महापुरुषों,शहीदों का अपमान होता है। आखिर झारखंड के गरीब आदिवासियों के लिए हेमंत सोरेन ने क्या किया? इनकी सरकार बनते ही चाईबासा में 7आदिवासियों की नृशंस हत्या हुई। अमर शहीद सिद्दो कान्हू के वंशज रामेश्वर मुर्मू की हत्या हुई।आदिवासी समाज की होनहार बेटी दरोगा रूपा तिर्की की संदेहास्पद मौत , गौ तस्करों के द्वारा तुपुदाना में दरोगा संध्या टोपनो की ट्रक से कुचलकर हत्या किस सरकार की उपलब्धि हैं। आदिवासी बेटी रुबिका पहाड़िया को टुकड़ों टुकड़ों में काटा गया,राज्य में हजारों आदिवासी बहन बेटियों की इज्जत को तार तार किया गया।होनहार आदिवासी युवक विकास मुंडा की हत्या किस सरकार की देन है।

आदिवासी कार्ड खेलकर आदिवासियों को लूटा
समीर उरांव ने सीएम हेमंत से सवाल करते हुए पूछा कि सीएम बताएं आदिवासी समाज की इस पीड़ा को दूर करने का आखिर क्या प्रयास मुख्यमंत्री जी ने किया।?दरअसल हेमंत सोरेन को आदिवासी समाज की चिंता नहीं है। ये केवल आदिवासी कार्ड खेलकर आदिवासियों को ही लूट रहे। छोटानगपुर एवम संथाल परगना के कई जिलों में इन्होंने अकूत संपत्ति खड़ा की। कहा कि बोकारो ,धनबाद,रांची,रामगढ़ ,दुमका कहां इनकी जमीन नही है। यदि जमीन नही बिकती तो फिर रांची में फायरिंग रेंज के पास साढ़े 8एकड़ का फार्म हाउस कहां से आया जिसकी कीमत 100करोड़ रुपए की है। दुमका में मुख्यमंत्री की का आलीशान बंगला कैसे बना 108 संपत्ति का तो एफिडेविट इन्होंने हाई कोर्ट में जमा किया है । इसके अलावा सैकड़ों बेनामी संपत्ति है जिनको इन्होंने गरीब आदिवासियों से नाम बदल बदल कर लूटा है। ये आदिवासियों केलिए कितना सोचते है वह उसी समय उजागर हो गया जब इन्होंने अपने नाम से ही खदान की लीज ले ली।

जनजाति समाज के लिए भेजी गई योजनाओं को लटकाया
उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार ने मोदी सरकार द्वारा जनजाति समाज के लिए भेजी गई योजनाओं को लटकाया है। आज राज्य में एकलव्य विद्यालयों के लिए राज्य सरकार जमीन तक उपलब्ध नहीं करा रही। ट्राइफेड द्वारा वन धन विकास योजना पर राज्य सरकार उदासीन है ,योजना सही तरीके से लागू नहीं हो रहे। फॉरेस्ट एक्ट पर भी राज्य सरकार जनता को लाभ नहीं पहुंचा रही,पेसा कानून भी व्यवहारिक तरीके से लागू नहीं हो रहा। हेमंत सोरेन जी को उनके किए की सजा भुगतनी पड़ेगी उसके लिए आदिवासी समाज जिम्मेवार नहीं है।
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