द फॉलोअप, बोकारो
बोकारो जिले के चंदनकियारी प्रखंड के दामुडीह पंचायत अंतर्गत गोपीनाथपुर निवासी 83 वर्षीय धरनीधर मांझी को सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित किए जाने के मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की नजर पड़ गई है। द फॉलोअप पर खबर चलने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस मामले का संज्ञान लिया है और बोकारो उपायुक्त को तत्काल जांच कर रिपोर्ट देने के साथ-साथ पीड़ित बुजुर्ग और उनके परिवार को मदद पहुंचाने का निर्देश दिया है। अब मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद धरनीधर मांझी और उनके परिवार को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। सीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाए और पीड़ित को हर संभव सहायता दी जाए।
.@BokaroDc कृपया मामले की जांच कर आदरणीय धरणीधर जी और उनके परिवार को मदद पहुंचाते हुए सूचित करें। https://t.co/y5kI1CCkQm
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) May 6, 2026

क्या है पूरा मामला?
धरनीधर मांझी को वर्ष 2022-23 में हुए संयुक्त भौतिक सत्यापन के बाद पंचायत स्तर पर मृत घोषित कर दिया गया, जबकि वे जीवित हैं। वर्ष 2021-22 तक उन्हें नियमित रूप से वृद्धा पेंशन मिल रही थी, लेकिन मृत घोषित किए जाने के बाद उनकी पेंशन बंद कर दी गई। यह पेंशन ही उनके बुढ़ापे का एकमात्र सहारा थी। धरनीधर मांझी पिछले लंबे समय से खुद को जिंदा साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने बीडीओ, उपायुक्त और उप विकास आयुक्त तक कई बार आवेदन देकर गुहार लगाई है। उनका दर्द साफ झलकता है- “हमरा पेंशन शुरू से मिलता रहा, लेकिन बाद में ब्लॉक के चक्कर काट-काट के थक गेलियो हई। हुज़ूर, हम ज़िंदा छी… हमरा जिंदा मानल जाए।”

किस पर लगे आरोप?
पीड़ित का आरोप है कि मुखिया, पंचायत सचिव और आंगनबाड़ी कर्मियों की संयुक्त रिपोर्ट के आधार पर उन्हें गलत तरीके से मृत घोषित कर दिया गया। इस लापरवाही ने न सिर्फ उनकी पेंशन छीन ली, बल्कि उन्हें अपनी ही पहचान साबित करने की लड़ाई लड़ने पर मजबूर कर दिया।